लखनऊ (चक गंजरिया): राजधानी के चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान इस समय डॉक्टरों की ही नहीं, बल्कि नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियनों की भारी कमी से जूझ रहा है। संस्थान में फैले बदइंतजामी और गंभीर वेतन विसंगति (Salary Disparity) के चलते पिछले दो सालों में करीब 70 स्टाफ नर्स, टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारी नौकरी को अलविदा कह चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अभी भी 20 से ज्यादा कर्मचारी संस्थान छोड़ने की तैयारी में हैं, जिससे यहाँ आने वाले कैंसर मरीजों के इलाज पर बड़ा संकट मंडराने लगा है।
## ओपीडी और वार्डों का हाल: 250 बेड फुल, संभालने वाला कोई नहीं
कैंसर संस्थान की जमीनी हकीकत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है:
भरी रहती है ओपीडी: संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 400 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
बेड हमेशा फुल: संस्थान में फिलहाल 250 बेड चालू हैं, जो हमेशा मरीजों से भरे रहते हैं।
बढ़ रहा है काम का दबाव: एक तरफ मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ स्टाफ घटने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ दोगुना हो गया है।
## कीमोथेरेपी और इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित, तीमारदार परेशान
कैंसर जैसे गंभीर रोग के इलाज में नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन रीढ़ की हड्डी की तरह होते हैं। कर्मचारियों के लगातार इस्तीफों की वजह से सीधे तौर पर मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है:
अहम जिम्मेदारियां भगवान भरोसे: मरीजों को समय पर दवा देना, कीमोथेरेपी (Chemotherapy) चढ़ाना, जरूरी पैथोलॉजी जांच, मॉनिटरिंग और इमरजेंसी केयर जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं अब लड़खड़ाने लगी हैं। सबसे ज्यादा परेशानी भर्ती मरीजों की निगरानी और जांच रिपोर्ट आने में हो रही है।
## ‘काम एक जैसा, तो सैलरी कम क्यों?’ – कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
संस्थान छोड़ने वाले और वर्तमान स्टाफ नर्सों का दर्द बिल्कुल जायज है। उनका कहना है कि लखनऊ के अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों जैसे PGI, लोहिया संस्थान और KGMU में भर्ती की योग्यता और काम का प्रोफाइल बिल्कुल एक समान है।
”जब हमारा काम और योग्यता PGI और लोहिया संस्थान के बराबर है, तो हमें सबसे कम वेतन क्यों दिया जा रहा है? बेहतर अवसर मिलने पर यहाँ से जाना हमारी मजबूरी बन चुका है।”
– नाम न छापने की शर्त पर एक स्टाफ नर्स
## अफसरों की बेरुखी से बढ़ा आक्रोश
कर्मचारियों का आरोप है कि वे लंबे समय से वेतन विसंगति को दूर करने और वेतन के मानकीकरण (Standardization) की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार शिकायती पत्र भी दिए गए, लेकिन संस्थान के आला अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं और कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
यदि प्रशासन ने जल्द ही वेतन विसंगति को दूर कर नए पदों पर भर्ती नहीं की, तो कैंसर जैसे जानलेवा रोग से लड़ रहे मरीजों के लिए स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती है।











