kgmu लिम्ब सेंटर : ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले राजू को मिली नई जिंदगी

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केजीएमयू ने कृत्रिम पैरों से फिर खड़ा किया

डाक्टरों की मेहनत से छह साल बाद अपने पैरों पर चला बाराबंकी का युवक

लखनऊ। छह वर्ष पहले एक दर्दनाक रेल हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले बाराबंकी के 22 वर्षीय राजू की जिंदगी में नई उम्मीद लौट आई है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप, केजीएमयू के चिकित्सकों की विशेषज्ञता और पुनर्वास टीम के अथक प्रयासों से राजू अब एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। कृत्रिम पैरों की सहायता से वह न केवल चलने लगा है, बल्कि सीढ़ियां चढ़ने, बैठने-उठने और दैनिक कार्य भी आत्मविश्वास के साथ कर पा रहा है।

बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील के लोहटी जेई गांव निवासी मजदूर फूलचंद्र के पुत्र राजू 22 अगस्त 2018 को घाघरा घाट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय दुर्घटना का शिकार हो गए थे। गंभीर रूप से घायल राजू को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनकी जान बचाने के लिए चिकित्सकों को दाहिना पैर घुटने के ऊपर से तथा बायां पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा था।

इलाज के बाद राजू घर लौट तो आए, लेकिन चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए कृत्रिम पैर लगवाना संभव नहीं था। आखिरकार परिजनों ने 2 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री जनता दरबार में अपनी पीड़ा रखी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामला केजीएमयू के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (डीपीएमआर) को सौंपा गया।

प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक यूनिट की प्रभारी शगुन सिंह ने बताया कि विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. आराधना के निर्देशन में राजू का उपचार शुरू किया गया। सबसे पहले उनके पैरों में बने घावों और छालों का उपचार किया गया। इसके बाद लुधियाना की एक कंपनी से लगभग 13 हजार रुपये मूल्य की आवश्यक सामग्री दान स्वरूप प्राप्त हुई, जबकि शेष संसाधन केजीएमयू में निर्धन मरीजों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराए गए।

करीब 50 हजार रुपये की लागत से दोनों कृत्रिम पैर तैयार किए गए, जिसका पूरा खर्च संस्थान और सहयोगी योजनाओं द्वारा वहन किया गया। कृत्रिम पैर लगाए जाने के बाद राजू को लगभग ढाई महीने तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उन्होंने संतुलन बनाना और सामान्य गतिविधियां करना सीखा।

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