लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में कथित दवा घोटाले की गूंज अब पूरे अस्पताल में सुनाई दे रही है। प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब कैंसर का इलाज करने वाले सात प्रमुख विभागों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। गुरुवार को रेडियोथेरेपी विभाग से इस महा-ऑडिट की शुरुआत की गई।
जांच के घेरे में ये 7 विभाग
प्रशासन ने उन सभी विभागों को रडार पर लिया है जहाँ कैंसर का इलाज और दवाओं की भारी खरीद होती है:
रेडियोथेरेपी
सर्जिकल आंकोलॉजी
यूरोलॉजी
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग
गायनी आंकोलॉजी
मेडिकल आंकोलॉजी
इंडोक्राइन सर्जरी
दस्तावेजों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
पांच सदस्यीय विशेष कमेटी ने रेडियोथेरेपी विभाग से पिछले 2-3 महीनों का पूरा मेडिकल कच्चा-चिट्ठा तलब किया है। जांच मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर टिकी है:
दवाओं का खेल: महंगी कैंसर दवाओं और इंजेक्शनों के ऑर्डर, बिल-बाउचर और स्टॉक की बारीकी से जांच।
मरीज वेरिफिकेशन: कमेटी यह देख रही है कि क्या महंगी दवाएं वास्तव में मरीजों को लगीं? इसके लिए मरीजों के UHID, मोबाइल नंबर और अन्य पहचान दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
सरकारी योजनाओं पर नजर: ‘असाध्य योजना’ और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले फंड और दवाओं के वितरण की भी पड़ताल शुरू हो गई है।
कर्मचारियों के बयान दर्ज
जांच टीम ने न केवल कागजों की जांच की, बल्कि संबंधित विभाग के कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह देखा जा रहा है कि दवा वितरण की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन हुआ या नहीं।
”जांच का मुख्य उद्देश्य दवा खरीद और वितरण में पारदर्शिता लाना है। यूरोलॉजी विभाग में सामने आई अनियमितताओं के बाद यह कदम उठाया गया है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
— डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, KGMU
आगे क्या?
फिलहाल रेडियोथेरेपी विभाग से शुरू हुई यह जांच आने वाले दिनों में बाकी के छह विभागों में भी चलेगी। इस ऑडिट से यह साफ हो जाएगा कि मरीजों के नाम पर आने वाली जीवन रक्षक दवाओं में कहीं कोई बड़ा सिंडिकेट तो काम नहीं कर रहा है।










