बच्चों और महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा
लखनऊ। यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के प्रमुख डॉ. ज़कारी एडम ने कल उत्तर प्रदेश विधानसभा के माननीय अध्यक्ष सतीश महाना से उनके विधानसभा कक्ष में मुलाकात की और राज्य में बच्चों, युवाओं और महिलाओं से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
डॉ. एडम ने भारत की सबसे बड़ी विधान सभा में विधायी कार्यवाही, गरिमा और शालीनता को सुदृढ़ करने में माननीय अध्यक्ष के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने में राज्य विधानसभाओं, विधायी समितियों और माननीय विधायकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उत्तर प्रदेश में लागभग 8.5 करोड़ बच्चे निवास करते हैं, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 43 प्रतिशत हैं—जो दुनिया के कई देशों की जनसंख्या से अधिक है।
विधान सभा अध्यक्ष ने राज्य के प्रमुख विभागों के साथ मिलकर बच्चों और महिलाओं के मुद्दों पर यूनिसेफ द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने विधायकों के साथ सक्रिय सहभागिता पर जोर देते हुए बच्चों से संबंधित सूचकांकों, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में राज्य की प्रगति, विभिन्न राज्यों और देशों के श्रेष्ठ अभ्यासों, तथा स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्रों में मौजूद चुनौतियों और अंतरालों की समझ को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस बैठक में डॉ. एडम के साथ सामाजिक नीति विशेषज्ञ सुश्री पियूष एंटनी तथा संचार विशेषज्ञ सुश्री निपुण गुप्ता चर्चा में सम्मिलित थीं।
चर्चा में उत्तर प्रदेश के चाइल्ड बजट स्टेटमेंट पर विशेष ध्यान दिया गया और इस बात पर विचार किया गया कि किस प्रकार विधायी समितियाँ और विधायक यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि विभिन्न विभागों द्वारा संचालित बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए लक्षित योजनाओं का लाभ सबसे वंचित और अंतिम पंक्ति तक पहुंचे।
राज्य सरकार की बच्चों के vikas हेतु महत्वपूर्ण पहलों—जैसे दस्तक अभियान, SAMbhav अभियान, बाल सेवा योजना और बाल श्रमिक योजना—जिन पर यूनिसेफ ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया है, का भी ज़िक्र हुआ
बैठक का समापन इस आश्वासन के साथ हुआ कि यूनिसेफ राज्य विधान सभा के साथ सहयोग और समर्थन को और मजबूत करेगा, ताकि उत्तर प्रदेश में बच्चों और महिलाओं के लिए सतत परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।










