कमरे की बिजली काटी; 44 डिग्री गर्मी में पसीने से तर हुईं अर्चना गहरवार
लखनऊ। राजधानी के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज कर्मचारियों ने कुलसचिव (रजिस्ट्रार) अर्चना गहरवार को उनके ही कार्यालय में बंधक बना लिया। प्रदर्शनकारियों ने कमरे की बिजली काट दी, जिसके चलते भीषण गर्मी में रजिस्ट्रार तीन घंटे तक कमरे के भीतर कैद रहीं।
बताया जा रहा है कि कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सुबह 10 बजे रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे थे। 44 डिग्री की भीषण गर्मी में कर्मचारी घंटों वार्ता का इंतजार करते रहे, लेकिन आरोप है कि कुलसचिव उनसे मिलने को तैयार नहीं हुईं। इसी ‘अड़ियल रवैये’ से नाराज होकर कर्मचारियों ने कमरे को बाहर से लॉक कर दिया और धरने पर बैठ गए।
अंधेरे में बेहाल रहीं कुलसचिव
आंदोलन के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब कर्मचारियों ने रजिस्ट्रार के कमरे की बिजली सप्लाई काट दी।
3 घंटे तक बिना पंखे और एसी के कमरे में बंद रहीं अर्चना गहरवार।
गर्मी के कारण वह पसीने से तर-ब-तर हो गईं।
कर्मचारियों ने उन्हें पानी तक मुहैया नहीं होने दिया।
”कुलसचिव के असहयोगात्मक रवैये के कारण कर्मचारी आक्रोशित हैं। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।”
— विकास सिंह, अध्यक्ष, KGMU कर्मचारी परिषद
कामकाज पूरी तरह ठप
इस हंगामे का सीधा असर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा:
कुलसचिव कार्यालय में कामकाज पूरी तरह ठप रहा।
जरूरी फाइलों का निस्तारण नहीं हो सका।
शासन को भेजे जाने वाले महत्वपूर्ण पत्र और बैठकें टालनी पड़ीं।
डीन डॉ. केके सिंह ने हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही।
इन प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की जंग
कर्मचारियों ने प्रशासन के सामने अपनी 6 सूत्रीय मांगें रखी हैं:
वेतनमान: 2016 से लंबित पीजीआई के समान वेतनमान और भत्ते।
प्रमोशन: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ओटी सहायक और लिपिक कैडर में प्रोन्नति।
ACP: पिछले 20-20 वर्षों से फंसी हुई एसीपी (ACP) का लाभ।
सैलरी फिक्सेशन: कार्यपरिषद के फैसले के बावजूद वेतन निर्धारण के आदेश जारी न होना।
कैडर मानकीकरण: कैडर रिस्ट्रक्चरिंग में हो रही देरी।
आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन को उप्र संयुक्त कर्मचारी परिषद ने भी अपना समर्थन दे दिया है। आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से विकास सिंह, केपी श्रीवास्तव, अनिल कुमार, और शैलेंद्र कुमार उर्फ भिंडी जैसे पदाधिकारियों ने किया। भारी पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ।












