लखनऊ। पीजीआई में हैड एंड नैक सर्जरी विभाग ने अपनी नैदानिक सेवाओं का एक वर्ष पूरा कर लिया है। हैड एंड नैक सर्जरी विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित केशरी के नेतृत्व में 1 मई को केजीएमयू, लखनऊ के एनाॅटाॅमी विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर की पहली शव विच्छेदन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को कौशल संवर्धन हेतु शव विच्छेदन का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
टाटा मेमोरियल सेंटर मुंबई के अग्रणी head & neck सर्जन डॉ. प्रथमेश पाई ने प्रथम एचएनएस फाउंडेशन व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। भारत भर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के 70 प्रतिभागियों ने कैडेवर पर विच्छेदन किया, जो शल्य चिकित्सा कौशल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. प्रथमेश पाई द्वारा एचएनएस फाउंडेशन व्याख्यान और विच्छेदन का प्रदर्शन था। पद्मश्री प्रोफेसर आरके धीमन, निदेशक, एसजीपीजीआई कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। अपने संबोधन में डॉ. धीमन ने पिछले 11 महीनों में विभाग की उपलब्धियों पर बधाई दी, जिनमें ओपीडी में 9000 से अधिक मरीजों का इलाज और 300 से अधिक सर्जरी करना शामिल है। उन्होंने सिर और गर्दन की सर्जरी में रोबोटिक्स की भूमिका पर भी जोर दिया और बताया कि संस्थान को दो और नवीनतम दा विंची रोबोट सिस्टम मिलने पर सिर और गर्दन की सर्जरी विभाग रोबोटिक सर्जरी शुरू करेगा।
पीजीआई के डीन प्रो. शालीन कुमार कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। उन्होंने सिर और गर्दन के कैंसर के रोगियों के लिए बहुविषयक देखभाल हेतु प्रोत्साहित किया तथा भविष्य की संभावनाओं के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर देवेंद्र गुप्ता भी उपस्थित थे। संबोधन में प्रो. अमित केशरी ने विभाग में हुए विकास और पिछले वर्ष आयोजित कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। आयोजन सचिव डॉ. इंदु शुक्ला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ उद्घाटन समारोह का समापन हुआ।
इस कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शनिवार को कार्यशाला के दूसरे दिन, प्रतिनिधियों को वरिष्ठ, अनुभवी संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन में फ्रोज़न कैडेवर पर शव विच्छेदन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिला।












