रा. नर्सेज संघ ने बिना INC से मान्यता प्राप्त संस्थानों को GNM , B.Sc Nursing का प्रशिक्षण को रोकने की मांग

0
206

मुख्यमंत्री को भेज कर संघ की मांग

लखनऊ। बिना इंडियन नर्सिंग काउंसिल(INC) से मान्यता प्राप्त संस्थानों को GNM एवं B.Sc Nursing का प्रशिक्षण संचालित करने से तत्काल रोका जाए तथा इस संबंध में
नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें। इसके लिए राजकीय नर्सेस संघ मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर कार्यवाही की मांग की है।

महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि 22-03-2026 को 1097 नर्सिंग अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देते हुए लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा नर्सिंग प्रोफेशन को नई दिशा देने की बात कही गई, उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में नर्सिंग कोर्स के साथ-साथ विद्यार्थियों को अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिससे उनका कैरियर और सशक्त हो सके। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत वैध (डुअल) डिग्री का विकल्प भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से छात्र-छात्राएं नर्सिंग के साथ-साथ अन्य विषयों में भी अध्ययन कर सकते हैं, किन्तु वर्तमान में प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई नर्सिंग कॉलेज बिना भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) की मान्यता के संचालित हो रहे हैं। ऐसे संस्थानों में GNM एवं B.Sc Nursing पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है।

भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) में पंजीकृत नर्सिंग कालेजों की कुल संख्या
उ०प्र० नर्सिंग कौंसिल में पंजीकृत नर्सिंग कालेजों की कुल संख्या (सोर्स-https://www.upsmfac.org/en)
(सोर्स-https://www.indiannursingcouncil.org) 1. GNM-267

1-GNM-615 ,2. B.Sc Nursing-192,3- B.Sc Nursing-426
महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि बिना INC मान्यता प्राप्त संस्थानों से GNM एवं B.Sc Nursing की पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों का पंजीकरण (Registration) उत्तर प्रदेश में हो जाता है, परंतु अन्य प्रदेशों में नहीं हो पाता है, जिसके कारण उ०प्र० को छोड़कर देश के किसी अन्य प्रदेश या विदेश में ऐसे अभ्यर्थी कहीं भी नर्सिंग कार्य नहीं कर सकते हैं, जिसके कारण उनका भविष्य संकट में पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री को पत्र में मांग की गई है कि बिना INC मान्यता प्राप्त संस्थानों को GNM एवं B.Sc Nursing का प्रशिक्षण संचालित करने से तत्काल रोका जाए तथा इस संबंध में
नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें।

Previous articleइस कारण बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा, हर 10 में एक व्यक्ति प्रभावित

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here