लखनऊ। दुनिया भर में किडनी की गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और अब इसके पीछे जलवायु परिवर्तन व पर्यावरणीय कारण भी बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। यह जानकारी लोहिया संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिलाष चन्द्रा ने दी।
लोहिया संस्थान में “प्लैनेटरी हेल्थ इन नेफ्रोलॉजी” विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने किडनी रोगों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने किया।
डॉ. अभिलाष चन्द्रा ने बताया कि असुरक्षित पानी, बढ़ता तापमान, वायु प्रदूषण और जहरीले तत्व किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। गंदा पानी पीने से शरीर में संक्रमण और विषैले पदार्थ पहुंचते हैं, जो धीरे-धीरे किडनी को प्रभावित करते हैं। वहीं अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे किडनी पर दबाव बढ़ता है और उसकी कार्यक्षमता घटती है।
निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने कहा कि वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण और रसायन रक्त के माध्यम से किडनी तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा कीटनाशक, भारी धातु और अन्य विषैले पदार्थ भी भोजन और पानी के जरिए शरीर में जमा होकर किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं।
रायपुर के डॉ. विनय राठौर ने सुझाव दिया कि साफ पानी, संतुलित आहार और प्रदूषण से बचाव अपनाकर किडनी को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं पटना के डॉ. प्रीतिपाल सिंह ने कहा कि नियमित रूप से स्वच्छ पानी पीना किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है।
कार्यशाला में पैनल चर्चा, पोस्टर प्रतियोगिता और एलुमनाई मीट का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. प्रत्यूष कुमार, आईआईटीआर के डॉ. विकास श्रीवास्तव, डॉ. नम्रता राव, सीएमएस डॉ. विक्रम सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह, डीन डॉ. प्रद्युमन सिंह और अहमदाबाद के डॉ. महावीर गोलेच्छा समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।












