निजी और विदेशी मेडिकल कॉलेज में पढ़े डाक्टरों के ईडब्ल्यूएस कोटे से तैनात में गड़बड़ी की हुई है शिकायत
लखनऊ। अपने को गरीब घोषित करने डॉक्टरों की जांच स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दिया है। बताया जाता है यह गरीब डॉक्टर हैं, जिन्होंने निजी मेडिकल कॉलेज या विदेशी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की है । दरअसल एनएचएम के जरिये ईडब्लूएस कोटा लगाकर नौकरी लेने वाले डॉक्टरों के प्रमाण पत्र की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ईडब्लूएस कोटे के माध्यम से नौकरी पाए डॉक्टरों के प्रमाण पत्र की जांच के लिए तहसील पत्र भेजा गया है। जांच के दौरान प्रमाण पत्र फर्जी मिले तो संबंधित डॉक्टरों से अनुबंध समाप्त करके उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर खुले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर संविदा पर एमबीबीएस डॉक्टरों केलिए बीते माह सात जनवरी में सीएमओ ऑफिस में वॉक इन इंटरव्यू हुआ था।
यहां 55 पद के सापेक्ष 400 डॉक्टर इंटरव्यू में शामिल हुए थे। इसमें निजी मेडिकल कॉलेज व विदेश से एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करके एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर भी शामिल हुए थे। अभ्यर्थियों ने ईडब्लूएस कोटा का प्रमाण पत्र तहसील से बनवाया था, जिसकी बदलौत उनका चयन ईडब्लूएस कोटे में स्वास्थ्य विभाग ने कर लिया। डॉक्टर की तैनाती भी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर हो गयी है।
मामले की शिकायत के बाद एनएचएम एमडी ने जांच के आदेश दिए हैं। जिसके बाद विभाग के जरिये तहसीलों में पत्र भेजकर प्रमाण पत्र की जांच कराई जा रही है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है जांच के दौरान प्रमाण पत्र गलत निकले तो सेवा समाप्त करके संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।
बताते चलें कि नियमानुसार आठ लाख सलाना आमदनी वाले व्यक्ति ईडब्लूएस के पात्र होते हैं,जिसके बाद वह इस कोटे के पात्र माने जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में दस फीसदी का आरक्षण है। यह 2019 में 103वें संशोधन के तहत लागू किया गया था।












