नई तकनीक से हार्ट का इलाज हो रहा आसान
लखनऊ। दिल की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। बेढंगी जीवनशैली, खान-पान और आरामतलबी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। नई दवाएं और इलाज की तकनीक में भी बदलाव आया है। यह जानकारी लोहिया संस्थान में कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने दी।
एसोसिएशन ऑफ कार्डियक टेक्नोलॉजिस्ट (एओसीटी) की ओर से सोमवार को कार्डियोवैस्कुलर टेक्नोलॉजिस्ट कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। कानपुर रोड स्थित होटल में देश-विदेश से लगभग 400 कार्डियोवैस्कुलर टेक्नोलॉजिस्ट एवं नर्सिंग प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया।
डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने कहा कि एआई आधारित कार्डियक इमेजिंग और डिजिटल कैथलैब सिस्टम आने वाले समय में इलाज की गुणवत्ता और सटीकता को नई ऊंचाई देंगे। इससे न केवल डॉक्टरों बल्कि टेक्नोलॉजिस्ट और नर्सिंग स्टाफ की कार्यक्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। आधुनिक कैथलैब अब पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट होते जा रहे हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग, रियल-टाइम डेटा एनालिसिस और ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
ऑर्गनाइजिंग वाइस प्रेसिडेंट व लोहिया संस्थान में कॉर्डियक टेक्नोलॉजिस्ट प्रियरंजन पांडेय ने कहा कि एआई आधारिक कॉर्डियक इंमेजिंग की मदद से दिल की धमनियों में ब्लॉकेज, रक्त प्रवाह और ऊतकों की स्थिति का बेहद सटीक आकलन संभव हो गया है। एआई एल्गोरिद्म मरीज के डेटा का विश्लेषण कर संभावित जोखिमों का पहले ही संकेत दे देते हैं।
जिससे समय रहते इलाज किया जा सकता है। डिजिटल कैथलैब सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें प्रक्रिया के दौरान मानव त्रुटि की संभावना कम हो जाती है। इमेज प्रोसेसिंग, डोज मैनेजमेंट और उपकरणों का ऑटोमेशन टेक्नोलॉजिस्ट को अधिक सटीक और तेज निर्णय लेने में मदद करता है। इससे जटिल प्रक्रियाएं भी सुरक्षित और प्रभावी बनती हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजिस्टों को समय-समय पर प्रशिक्षण जरूरी है। इससे डॉक्टरों को भी मदद मिलेगी। मरीजों को और बेहतर इलाज मिलने की राह आसान होगी।
केजीएमयू लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. शरद चन्द्रा ने कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक कार्यक्रम नए टेक्नोलॉजिस्ट और नर्सिंग स्टाफ के लिए सीखने का बड़ा अवसर हैं। प्रशिक्षण सत्रों में उन्हें अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन, डेटा इंटरप्रिटेशन और मरीज प्रबंधन के नए तरीकों की जानकारी मिलती है। इससे उनका तकनीकी कौशल और पेशेवर आत्मविश्वास दोनों मजबूत होते हैं।
पीजीआई कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदित्य कपूर ने कहा कि आधुनिक कैथलैब में कार्डियोवैस्कुलर टेक्नोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। जटिल एंजियोप्लास्टी, टावी, एएसडीए-वीएसडी क्लोजर, सीटीओ इंटरवेंशन एवं इंट्रावास्कुलर इमेजिंग जैसी प्रक्रियाओं में टेक्नोलॉजिस्ट की तकनीकी दक्षता मरीज की सुरक्षा एवं सफल उपचार में अहम योगदान देती है।
कैथलैब टेक्नोलॉजिस्ट न केवल मशीनों का संचालन करते हैं, बल्कि वे डॉक्टरों की टीम का एक मजबूत स्तंभ बनकर कठिन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय, सटीक इमेजिंग एवं बेहतर प्रोसीजर सपोर्ट प्रदान करते हैं। लोहिया संस्थान में कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. आशीष झा, डॉ. गौतम स्वरूप, शिवदयाल, संतोष कुमार, मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर मौजूद रहे।












