लखनऊ। डा. राम मनोंहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर (एनएबीएच) प्रमाण-पत्र हासिल करने वाला प्रदेश का पहला सरकारी मेडिकल संस्थान बन गया है, जबकि उत्तर भारत का दूसरा संस्थान बन गया है। यह बात संस्थान की संस्थान की निदेशक डॉ. सोनिया नित्यानंद ने पत्रकार वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि संस्थान को एनएबीएच के मानकों पर खरा उतारने के लिए अधिकारी और कर्मचारियों ने कड़ी मेहनत की है। इससे मरीजों को फायदा मिल रहा है। मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में उच्चस्तरीय सुधार किया जा रहा है। इसके तहत रोगी सुरक्षा और देखभाल की क्वालिटी के बेसिक में परिवर्तन किया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में एनएबीएच मान्यता के लिए आवेदन किया था। कोविड काल के कारण से प्रक्रिया में देरी हो गयी। इसके बाद एनएचबीएच की टीम ने संस्थान का निरीक्षण किया। वर्ष 2022 में लगभग 400 प्रकार के सुधार का परामर्श दिया गया। वर्ष 2023 में दो और निरीक्षण किये गये। अप्रैल में दूसरे निरीक्षण में 88 सिफारिशें की गईं। इसके बाद सभी शिकायतें गहनता से अध्ययन करके दूर की गईं। टीम के सुझाव पर अमल किया गया। परिणाम सभी के सामने है। संस्थान एनएबीएच प्रमाण-पत्र हासिल करने वाला प्रदेश का पहला सरकारी मेडिकल संस्थान बन गया है,
जबकि उत्तर भारत का दूसरा संस्थान बन गया है। इस अवसर पर डा. स्मिता चौहान, लोहिया संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. विक्रम सिंह, प्रवक्ता डा. एपी जैन सहित कई वरिष्ठ डाक्टर मौजूद थे।












