लखनऊ। पीजीआई के बाद किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में भी रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की कवायद तेज कर दी गयी है। केजीएमयू प्रशासन ने रोबोट खरीदने का प्रस्ताव भेजने के अलावा पेटसीटी स्कैन मशीन खरीदने के लिए बजट मिलने की उम्मीद जतायी है। यह जानकारी केजीएमयू कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने अपने छह महीने का कार्यकाल पूरा होने के बाद पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। पत्रकार वार्ता में उनके साथ टीम के डीन डॉ उमा सिंह, डॉ अनिल चंद्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसएन शंखवार, डॉ ऋ षि शेट्टी, डॉ. विनोद जैन, ट्रामा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संदीप तिवारी, केजीएमयू प्रवक्ता व डॉ. सुधीर सिंह आदि मौजूद थे।
कुलपति ने बताया कि रोबोट स्थापित करने के लिए लगभग पूरी तैयारी हो चुकी है। इससे गंभीर मरीजों की अति सूक्ष्म सर्जरी की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि कोरोना से पॉजिटिव मरीजों की संख्या बेहद कम होने के बाद सामान्य मरीजों की ओपीडी भी शुरू हो गयी। आन लाइन पंजीकरण के अलावा ऑन स्पाट भी मरीजों के पंजीकरण किये जा रहे है। इसके अलावा सर्जरी भी चल रहे है, वेंटिग के मरीजों की सर्जरी के लिए कॉल करके बुलाया जा रहा है। इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी कार्य चल रहा है। प्रायोगिक तौर पर कोविड कॉल में एक्सरे से कोविड परखने के लिए कार्य किया गया है। चिकित्सा तकनीक को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित बनाने के लिए जल्द ही एकेटीयू से एमओयू करने की तैयारी की जा रही है।
कुलपति ने कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट को फिर से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। केजीएमयू में अभी तक नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं है। इस कारण किडनी ट्रांसप्लांट शुरू नहीं किया जा सका है।
कुलपति ने बताया कि जल्द ही महत्वपूर्ण योजना के तहत प्री -हॉस्पिटल केयर ट्रामा शुरू करने का भी प्रयास किया जा रहा है। इस योजना में दस किलोमीटर के रेडियस में कहीं भी एक्सीडेंट होने या कोई हादसा होने पर ट्रामा विशेषज्ञो की टीम मौके पर ग्रीन विंडों की मदद से मौके पर पहुंचेगी और प्राथमिक उपचार देकर मरीज ट्रामा सेंटर ले आएगी। इसमें यातायात पुलिस व अन्य जिम्मेदारी अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ डी हिमांशु ने बताया कि शव वाहन चालक की मनमानी रोकने के लिए केजीएमयू प्रति किलोमीटर के हिसाब से शव वाहन का किराया निर्धारित करेगा। इसके अलावा सबसे ज्यादा रिसर्च वर्क पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय संस्थानों से एमओयू भी किया जा रहा है।












