लखनऊ । संजय गांधी पी जी के क्रिटिकल केयर मेडिसिन के जन्म दाता प्रोफेसर ए के बरौनिया ने संस्थान को अलविदा कर दिया है। प्रो. बरौनिया ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन किया था, जिस पर मुख्य सचिव से मुहर लग गयी है। यहां से अलविदा कहने के बाद प्रो. बरौनिया उत्तरांचल स्थित पिथौरागढ के मेडिकल कालेज में एक अक्टूबर को प्रधानाचार्य के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लेगे। यह आदेश संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर के धीमान ने जारी किया हैं।
प्रोफेसर बरौनिया संस्थान के एनिस्थिसिया के विभाग में चिकित्सक के पद पर 10 वर्ष तक तैनात रहे । वह आपरेशन थियेटर में मरीजों को शल्यक्रिया करते समय तक मरीज को एनिस्थिसिया देने की तकनीक बताने के कार्य को अंजाम दिया। देश विदेश के ख्याति प्राप्त तथा पी जी आई के निदेशक और के जी एम यू के कुलपति रहे चुके प्रो महेंद्र भंडारी ने अपने कार्यकाल के दौरान पीजीआई में मरीज के अंगो में मल्टीपल बीमारी से बचाव के लिए एक गहन चिकित्सा कक्ष में जीवन रक्षक उपकरणों से बचाने के लिए क्रिटिकल केयर विभाग शुरू करने की योजना बनायी। इसके संचालन के लिए एक विभागाध्यक्ष की खोज शुरू हुई तो इसके लिए विशेषज्ञ प्रो ए के बरौनिया को चयनित किया। प्रो. बरौनिया की प्रतिभा का फायदा देश तथा प्रदेश के कोने-कोने से आये मरीजों को मिलने लगा। इसके बाद वर्ष 1995 में क्रिटकल केयर का विस्तार होकर क्रिटिकल केयर मेडिसिन बन गया आैर प्रो. बरौनिया को ही चलाने की जिम्मेदारी निदेशक प्रो भंडारी ने दी। उन्होंने बखूबी इस विभाग को प्रदेश के मरीजों को फायदा दिया, यहां देश विदेश के मरीज भी वेन्टीलेटर में भर्ती के लिए जुगाड़ लगाने के अलावा शासन प्रशासन तक सिफारिश आती हैं। इस विभाग ने देश विदेश में मरीजों के इलाज के अलावा अन्य चिकित्सक को तैयार करके सेवा के लिए खोज की है। इस विभाग को तैयार करने के मेडिकल काउंसिल आँफ इंडिया में पंजीकरण कराने के लिए सुपर स्पेशियलिटी में दक्षता हासिल की हैं।












