लखनऊ। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि डॉक्टर खुद अगर रक्तदान करता है, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। जब समाज में लोगों को जानकारी होगी कि डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के साथ ही उनकी जान बचाने के लिए खुद रक्तदान भी करते है, तो रक्तदान करने के लिए लोग जागरूक होंगे। इससे जरूरतमंद मरीजों की मदद की जा सकेगी और ब्लड के लिए किसी को भटकना नहीं पड़ेगा।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना रविवार को गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित ब्लड डोनेशन कैम्प के उद्घाटन समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर ब्लड डोनेशन करने वाले डाक्टरों को भी सम्मानित किया गया। समारोह में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एके त्रिपाठी और ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ वीके शर्मा ने भी मौजूद थे। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि अस्पताल आने वाले हर मरीज को तुरंत इलाज मिलना चाहिए। निदेशक प्रोफेसर एके त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान आने वाले ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इमरजेंसी के जरिए इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान सीएमएस डॉ राजन भटनागर, डॉ भुवन चंद्र तिवारी, डॉ मालविका आदि मौजूद रहे। समारोह में चिकित्सा शिक्षामंत्री ने लगातार ब्लड डोनेशन करने वाले डाक्टरों को भी सम्मानित किया। इनमें डॉ अमरेंद्र नारायण ने 52 बार, डॉक्टर स्वागत महापात्रा ने 32 बार, डॉ एसएस नाथ ने 30 बार, डॉ सुब्रत चंद्रा ने 25 बार, डॉ गीता अग्रवाल और डॉक्टर श्रीकेश सिंह व डॉक्टर संजय भट्ट ने 15 बार , डॉ डीके श्रीवास्तव ने 14 बार, डॉक्टरडॉ हेमंत ने 12 बार, डॉ विक्रम सिंह ने छह बार डॉ पंकज अग्रवाल ने 9 बार रक्तदान किया है। इसी तरह संजय सिंह ने 16 बार, अमित शर्मा ने 39 बार और दिलीप गुप्ता ने 13 बार रक्तदान किया है।












