लखनऊ। संजयगांधी पीजीआई की तर्ज पर अब गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती मरीज के तीमारदार का भी कोरोना की जांच कराना अनिवार्य होगी। जांच रिपोर्ट निगेटिव होने की पुष्टि के बाद ही एक तीमारदार ही मरीज के साथ वार्ड में जा सकेगा। दरअसल संस्थान में लगातार मरीज व उनके तीमारदार में कोरोना संक्रमण होने की घटनाओें के बाद डाक्टर, क्लीनिकल स्टाफ को सुरक्षित रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
बताते चले कि लोहिया संस्थान में तीन दिन पहले एक कार्डियक मरीज डाक्टर को दिखाने आया। मऊ निवासी इस मरीज की जांच के लिए नमूना भी लिया गया था। अगले दिन जांच में यह मरीज कोरोना संक्रमित मिला। सर्विलंास में पता चला कि मरीज के साथ में मौजूद बेटा संस्थान की कैथ लैब से लेकर जांच कराने के लिए विभिन्न काउंटरों पर गया था।
ऐसे में संस्थान प्रशासन ने सावधानी व प्रोटोकॉल को देखते हुए मरीज के बेटे का भी कोरोना जांच करायी गयी। शुक्रवार की शाम को जब उसकी रिपोर्ट को देखा गया, तो पता चला कि उसकी जांच रिपोर्ट पाजिटिव निकली। इसके अलावा बताया जाता है कि आंकोलॉजी में भी दिखाने आया एक मरीज की रिपोर्ट भी संक्रमित मिली है। इसके बाद तो संस्थान प्रशासन से लेकर डाक्टरों तक में अफरा-तफरी मच गयी। तत्काल निदेशक डा. ए के त्रिपाठी ने डॉक्टरों के साथ आपातकालीन बैठक की। बैठक में कोविड-19 की गाइड लाइन पर मंथन करने के बाद पीजीआई के तर्ज पर भर्ती मरीजों के तीमारदारों का भी कोराना की जांच अनिवार्य कर दी गयी।
मरीज को भर्ती कराने के साथ ही कोरोना जांच कराने वाले तीमारदारों को ही वार्ड में प्रवेश व रुकने की अनुमति होगी। हालांकि लोहिया संस्थान प्रशासन का दावा है कि कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद तत्काल प्रोटोकॉल के अनुसार उस क्षेत्र को सेनिटाइज कराया जाता है, जहां पर मरीज गया था।












