लखनऊ- प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करना प्रत्येक मनुष्य का अधिकार है और डाक्टरों को विशेष रूप से महिलाओं,बच्चों एवं बुजुर्गो पर अत्यधिक ध्यान देना चाहिए। श्रीमती पटेल शुक्रवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित कर रही थी। अटल बिहारी कन्वेशन सेंटर में आयोजित समारोह में कुलाधिपति एंव राज्यपाल ने 46 मेडिकोज को मेडल प्रदान किए गए। मेडल पाने वालों में 50 प्रतिशत संख्या छात्राओं की एवं 50 प्रतिशत संख्या छात्रों की रही। इस वर्ष प्रतिष्ठित हीवेट मेडल वर्ष 2014 एमबीबीएस की छात्रा सना मोहसिन को दिया गया, जबकि आकर्षि गुप्ता को चांसलर व विश्वविद्यालय सम्मान मेडल दिया गया।
सना मोहसिन ने एमबीबीएस की फाइनल प्रोफेशनल की परीक्षा में सबसे अधिक अंक हासिल किए हैं, जबकि एमबीबीएस के सभी प्रोफेशनल वर्ष में शानदार प्रदर्शन किए जाने पर आकर्षि गुप्ता को चांसलर मेडल दिया गया। इसके साथ ही आकर्षि गुप्ता सबसे ज्यादा मेडल पाने वाली स्टूडेंट बनी। उन्हें कुल 25 मेडल मिले, इसमें से 16 गोल्ड, चार सिल्वर मेडल, दो बुक प्राइजेज और तीन कैश प्राइज शामिल हैं। समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर चिकित्सा शिक्षा, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं महानिदेशक, भारतीय चिकित्सा एवं आर्युविज्ञान परिषद, नई दिल्ली बलराम भार्गव उपस्थित मौजूद थे।
दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रोें में निवास करती है, जो जानकारी के अभाव में मंहगे इलाज होने की वजह से अत्याधुनिक क्लीनिकल अपडेट का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। इन्हें क्लीनिकल सुविधा उपलब्ध कराने में हमारे ं को विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों एवं वृद्धों पर अत्यधिक ध्यान देना चाहिए। राज्यपाल ने रोगी एवं डाक्टरों के संबंधों के विषय में चिकित्सा छात्रों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वे बदलते परिवेश में रोगी-चिकित्सक के संबंध में हो रहे परिवर्तनों को जरूर पहचानें।
राज्यपाल ने इस बात पर दु:ख व्यक्त किया कि चिकित्सालयों के निरीक्षण के दौरान कुछ रोगियों द्वारा मेरे संज्ञान में लाया गया कि उनसे इलाज के पैसे मांगे जाते है। यह स्थिति चिन्तनीय व निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि गलती एक की होती लेकिन बदनामी पूरे संस्थान की होती है। चिकित्सालय प्रशासन को इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। समारोह में चिकित्सा शिक्षा, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि डाक्टर बनने के लिए कड़े मेहनत की आवश्यकता होती है, परन्तु मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार करके ही डाक्टर बेहतर चिकित्सा सेवा कर सकेंगे, उन्होंने कहा कि डाक्टर को धैर्यवान होना चाहिए। इस पहले सुबह करीब साढ़े नौ बजे आर्मी के बैंड की धुन बजते ही केजीएमयू के 15वें दीक्षांत समारोह में शैक्षिक यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा में सबसे आगे कुलसचिव चल रहे थे आैर उनके पीछे फैकल्टी सदस्य चल रहे थे।
अंत में कुलाधिपति व राज्यपाल आंनदी बेन चल रही थी। यही शैक्षिक यात्रा समारोह के अंत में कुलापति आगे चल रही थी आैर अंत में कुलसचिव चल रहे थे। समारोह का उद्घाटन कुलाधिपति , चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने संयुक्त रूप से किया। इसके अलावा धंन्वतरिवाटिका का भी उद््घाटन किया गया। विशिष्ट अतिथि बलराम भार्गव ने कहा कि दुनिया के बेहतरीन डाक्टर हमारे देश में सेवा कर रहे हैं। हमे अब किसी भी प्रकार के इलाज के लिए विदेश नहीं जाना पड़ता है।
उन्होंने उपाधि लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सफलता का मंत्र प्रोफेशनल, कॉम्पटेंसी, अनुशासन और ईमारदारी एवं एकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी को बताया। डा. भार्गव ने कहा कि आज कल मरीज आैर डाक्टर के बीच तीमारदार, फार्मा आैर गूगल होता है। ऐसे में डाक्टरों को समझ से काम करना चाहिए। इस अवसर पर कुलपति द्वारा कुलाधिपति को प्रतीक चिन्ह के रूप में किताबे भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने केजीएमयू की उपलब्धियों की जानकारी दी।
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