लखनऊ । सुप्रीमकोर्ट एवं हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रदेश का आयुष विभाग बच्चों के भविष्य को लेकर इस साल भी गंभीर नही हैं । विभाग की लापरवाही के चलते जहां बीते वर्ष सैंकड़ों बच्चे कालेज में प्रवेश लेने के बावजूद वार्षिक परीक्षा आज तक नही दे पाये है। जब कि वर्ष 2018 और 2019 के सत्र में भी 15 फरवरी को प्रवेश लेने के लिए होने वाली अन्तिम काउन्सिलिंग की जानकारी अभी भी बच्चों तक नही पहुंच पाई है। इस अन्तिम काउन्सिलिंग के लिए सिर्फ आगरा के नेमीनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कालेज को ही अनुमति मिल सकी है।
बताते चले कि बीते कई वर्षो से आयुष में मेडिकल प्रवेश के लिए परीक्षा के बाद अगर काउन्सिलिंग से सीटें नही भरती थी, तो कालेजों को सीधे तौर पर प्रवेश लेने की सरकार ने अनुमति दे रखी थी। जिसके चलते कई वषों से प्रदेश भर के आयुष कालेज सीटे न भरने की स्थिति में सीधे प्रवेश ले रहे थे। इसी प्रक्रिया के तहत बीते वर्ष भी प्रदेश भर के आयुष कालेजों ने सीधे प्रवेश लेकर सीटें भर ली थी और इसकी सूचना भी सरकार को लिखिततौर पर उपलब्ध करा दी थी। लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते कालेजों द्वारा लिए गये प्रवेश पर न तो आपत्ति जताई और न ही अनुमति देने के नाम पर कोई पत्र जारी किया ।
यही नहीं जब कालेजों ने खाली रह गयी सीटों पर सीधे प्रवेश से बच्चों का एडमीशन ले लिया तो सरकार और विभाग ने इन कालेजों के प्रवेश को ही अवैध घोषित कर दिया। जिससे करीब ढाई हजार बच्चों के डाक्टर बनने का सपना टूट गया।
इस वर्ष फिर से वर्ष 2018-19 में भी दो राउन्ड काउन्सिलिंग ही हो पाई है,और तीसरी काउन्सिलिंग के लिए सिर्फ आगरा के नेमीनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कालेज को ही अनुमति दी है, लेकिन विभाग का आलम यह है कि 15 फरवरी को नेमीनाथ मेडिकल कालेज में होने वाली अन्तिम काउन्सिलिंग की जानकारी आज तक बच्चों तक नही पहुंच पाई है। बताया जाता है कि अपने स्तर पर जिन बच्चों इस सत्र की आखिरी काउन्सिलिंग की जानकारी मिल गयी है वह कालेज में कई दिनों से डेरा डाले हुए है। जब कि आयुष विभाग का कहना है कि काउंसलिंग की सूचना नियमानुसार सभी को भेज दी गयी है।
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