लखनऊ। मिजिल्स रुबेला (एमआर) का टीका लगने के बाद बीमार हुई बच्ची नैन्सी की मंगलवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेन्टर में मौत हो गयी। नैन्सी को 7 फरवरी को ट्रामा सेन्टर में भर्ती कराया गया था। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। बच्ची की मौत पर परिजनों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि टीकाकरण ने उनकी बेटी की जान चली गयी। उधर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीर को देखते हुए शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दे दिया। जब कि केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि मरीज को ट्यूबरकुलर मैनिंजाइटिस और हाईड्रोसिफेलस की समस्या थी, जिसके लिए न्यूरोसर्जन द्वारा सर्जरी भी की गयी थी ,लेकिन हालत गंम्भीर होने के कारण बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
बताते चले कि नैन्सी को पिछली 29 नवम्बर को एमआर का टीका उसके स्कूल में लगाया गया था। परिजनों का आरोप है कि टीकाकरण के अगले ही दिन से नैन्सी बीमार हो गयी। मंगलवार की सवेरे ग्यारह बजे सात वर्षीय नैन्सी ने ट्रामा सेन्टर में मौत हो गयी। बच्ची की मौत होते ही उसके पिता राजू की आंखों से आंसू थम ही नहीं रहे थे। उन्होंने रोते हुए आरोप लगाया कि गलत टीकाकरण ने उसकी बच्ची की जान ले ली। रहीमाबाद संवाददाता के अनुसार मलिहाबाद के फतेहनगर निवासी राजू ने बताया कि बेटी नैन्सी ज्ञानवती स्कूल में पढ़ती है जहां नवम्बर में 24 तारीख को टीका लगाने वाले आए थे। शिक्षकों के सामने स्वास्थ्य कर्मियों ने नैन्सी को एमआर का टीका लगाया। टीका लगाने के अगले ही दिन बेटी को बुखार आना शुरू हो गया।
डाक्टर से दवा लेने के बाद भी बेटी की तबियत में सुधार के बावजूद हालत और बिगड़ती चली गयी। राजू ने बताया कि वह नैन्सी को स्थानीय क्लीनिक से लेकर जिला अस्पताल तक ले गए ,लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। किसान राजू के अनुसार अलग-अलग डाक्टरों से इलाज कराने में उसके दो लाख रुपये खर्च हो गये, लेकिन बेटी की बीमारी ठीक नही हुई। डाक्टरों ने उससे बताया कि दवा के रिएक्शन की वजह से नैन्सी की तबियत बिगड़ी है। वह बेटी को पीजीआई भी ले गया था, लेकिन वहां डाक्टरों ने बेटी का ट्रामा सेन्टर ले जाने की सलाह दी।
गत सात फरवरी को वह बेटी का ट्रामा सेंटर लेकर आए, जहां उसे भर्ती कर इलाज चल रहा था। बेटी का सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। मंगलवार को सवेरे करीब 11 बजे नैन्सी ने दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और टीका लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर किसी तरह से शांत कराया।
वहीं इस बारे में केजीएमयू के मीडिया प्रभारी प्रो. संतोष कुमार का कहना है कि मरीज को ट्यूबरकुलर मैनिंजाइटिस और हाईड्रोसिफेलस की समस्या थी, जिसके लिए न्यूरोसर्जन द्वारा सर्जरी भी की गयी थी लेकिन हालत ग भीर होने के कारण बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
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