न्यूज। लगातार शोध कर रहे शोधकर्ताओं ने मनुष्य के पेट में दो हजार अनजान जीवाणुओं की प्रजातियों का जानकारी मिली है। इस शोध के बाद मनुष्य के हेल्थ सिस्टम को बेहतर ढंग से समझने आैर पेट के रोगों के निदान एवं उपचार में भी मदद मिल सकती है। यूरोपियन मोलेक्यूलर बायोलोजी लेबोरेटरी आैर वेलकम सैंगर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने जीवाणुओं के ऐसे कुछ प्रजातियों की खोज की है, उन्हें अभी तक प्रयोगशाला में विकसित नहीं किया गया है।
अनुसंधानकर्ताओं ने दुनिया भर में व्यक्तियों से मिले नमूनों के विश्लेषण के लिए गणन विधियों का इस्तेमाल किया।
विज्ञान पत्रिका ‘नेचर” में प्रकाशित अध्ययन के नतीजे दिखाते हैं कि अनुसंधानकर्ता उत्तर अमेरिकी आैर यूरोपीय समुदायों में आम तौर पर पाए जाने वाले माइक्रोबायोम्स से मिलते जुलते माइक्रोब की एक समग्र सूची बनाने के करीब हैं, लेकिन दुनिया के दूसरे क्षेत्रों से आकंड़े उल्लेखनीय रूप से गायब हैं।
मानव पेट में ‘माइक्रोब” की ढेर सारी प्रजातियां रहती हैं आैर सामूहिक रूप से उन्हें ‘माइक्रोबायोटा” के तौर पर जाना जाता है। इस क्षेत्र में गहन अध्ययन के बावजूद अनुसंधानकर्ता अब भी माइक्रोब की एक एक प्रजाति को पहचानने आैर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मानव स्वास्थ्य में उनकी क्या भूमिका है। मानव उदर से बाहर नहीं टिक पाने से इस दिशा में ज्यादा दिक्कत हुई है।
यूरोपियन मोलेक्यूलर बायोलोजी लेबोरेटरी के रॉब फिन ने बताया, ”हम देख रहे हैं कि यूरोपीय आैर उत्तर अमेरिकी आबादियों में ढेर सारी प्रजातियां उभर कर आ रही हैं।”” वेलकम सैंगर इंस्टीट्यूट के ग्रुप लीडर ट्रेवर लॉली ने बताया, ”इस तरह के अनुसंधान हमें मानव उदर का तथाकथित ब्ल्यूपिं्रट तैयार करने में मदद कर रहे हें जो भविष्य में मानव स्वास्थ्य आैर रोग को बेहतर ढंग से समझने में आैर यहां तक की उदर रोगों के निदान आैर उपचार में मदद कर सकते हैं।
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