गर्भनिरोधक गोलियां का ऐसे सेवन हो सकता है खतरनाक

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लखनऊ। स्वच्छता किसी भी स्तर पर हो सकती है,अस्पताल हो या कहीं भी स्वच्छता अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इससे लिए डाक्टर्स व सभी बुद्धिजीवी वर्ग को सहयोग देना चाहिए। यह बात महापौर संयुक्ता भाटिया ने होटल क्लार्क अवध में आयोजित स्त्री रोगों पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कही। आईएफएस के तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन महापौर व डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डा. दीपक मालवीय ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला में प्रतिष्ठित संस्थानों के अलावा पीजीआई, लोहिया संस्थान, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डाक्टरों ने भाग लिया।

कार्यशाला में आईवीएफ विशेषज्ञ डा. गीता खन्ना ने कहा कि युवा जोड़ों को परामर्श दिया कि उनके गर्भधारण करने की 12 महीने की कोशिश के बाद भी गर्भधारण न हो सके, तो उन्हें बांझपन विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर शादी के वक्त उम्र 35 से ज्यादा है तो जीवन शैली व मोटापे पर नियंत्रण रखना होगा। क्योंकि कुदरती रूप से जो अंडाणु मिले है वह बढ़ती उम्र के साथ समाप्त हो जाते है। उन्होंने बताया कि अंडाशय के विफल होने की दो स्टेज होती है। यह प्रारम्भिक जीवन में विफल हो सकता है, जिसे प्री मेच्योर आवेरियन फेल्योर भी कहा जा सकता है। दूसरी स्टेज होती है रजोनिवृति कहा जा सकता है।

अंडाणु 35 वर्ष से पहले भी सक्रियता खो सकते है। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कालेज की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सुधा प्रसाद ने कहा कि प्रदूषण, मोटापा के अलावा खानपान का प्रभाव स्त्री व पुरूष दोनों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श लेना चांिहए। विशेषज्ञ डा. एम गौरी देवी ने कहा कि अब यह भी देखा जा रहा है जो महिलाएं लम्बे समय तक गर्भनिरोधक गोलिया का सेवन करती है। उन्हें भी गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है।

इसके अलावा कभी भी गर्भनिरोधक गोलियां का सेवन बिना परामर्श के नहीं करना चाहिए। सरकार अस्पतालों में परिवार नियोजन का परामर्श व गोलियां निशुल्क मिलती है। उन्होंने क हा कि 35 वर्ष की उम्र में विवाह के बाद स्वास्थ्य सम्बधी विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए। उन्होंने एंडोमेट्रियोसिस, डायबिटीज, थैलेसीमिया से भी होने वाली दिक्कतों पर चर्चा की। कार्यशाला में डा. पंकज तलवार,डा. रूपाली तथा डा. प्रताप कु मार मौजूद थे।

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