लखनऊ। बलरामपुर, सिविल अस्पताल सहित कई अन्य सरकारी अस्पतालों में कैंसर समेत ब्लड की दूसरी बड़ी महंगी जांचें तीन नवम्बर से बंद हो जाएंगी। अस्पतालों में खुले लोहिया संस्थान के ब्लड कलेक्शन सेंटर को बंद करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसकी वजह से गरीब मरीजों को विशेष जांच नही हो पाएगी। मरीजों को अब महंगी कीमत चुकाकर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच कराना पड़ेगा। यह सेंटर के बंद करने की तारीख भी तय कर दी गई है। इस बारे में लोहिया संस्थान की पैथालॉजी विभाग की प्रमुख डा. नुजहत का कहना है कि तीन नवम्बर को जांच एजेंसी के साथ करार समाप्त हो रहा है। तीन नवम्बर तक क्या हो सकता है। यह तब निर्णय लिया जाए। सरकारीअस्पतालों में निजी एजेंसी से लैब का अपडेट कराया जा रहा है। इससे उनकी द्वारा की जांच काफी संख्या कम भी हो सकता है। फिलहाल लखनऊ के एक सेंटर से अन्य पांच सेंटरों में जांच जारी रहेगी।
बताते चले कि उप्र हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथनिंग परियोजना के तहत हाई इंड लैबोरेट्री यूनिट का संचालन वर्ष 2015 से बलरामपुर, सिविल, रानीलक्ष्मीबाई , लोकबंधु, डफरिन व झलकारी बाई अस्पताल में हो रहा है। इसमें लोहिया संस्थान सरकारी अस्पतालों सेमरीजों के सैंपल लेकर जांच करके रिपोर्ट भी आन लाइन कर देता है। इन जांचों का भुगतान उप्र हेल्थ सिस्टम स्ट्रेन्थनिंग परियोजना के तहत होता था। हर अस्पताल से करीब दो से तीन लाख रुपए का खर्च जांच में आता था। समय पर जांच का भुगतान न होने पर लोहिया संस्थान ने रेफरल सेंटर बंद करने की तैयारी कर ली है।
ऐसे में सरकारी अस्पतालों में होने वाली मरीजों की कैंसर, विटामिन डी-3, अर्थराइटिस, डीएनए, थॉयराइड, विटामिन डी 12, कल्चर समेत तमाम महंगी जांच तीन अक्टूबर से बंद हो जाएंगी। इसे लेकर अस्पताल के प्रभारियों में खलबली मची है। अपर परियोजना निदेशक ने इस बावत सभी सरकारी अस्पताल के प्रभारियों को अवगत करा दिया है। अपर परियोजना निदेशक डॉ. हर्ष शर्मा ने बताया कि सभी अस्पतालों में खुले रेफरल सेंटर के सैंपल लेने के लिए लोहिया संस्थान ने मना कर दिया है।
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