केजीएमयू प्रशासन ने ट्रामा सेंटर में भीड़ कम करने को लेकर उठाये कड़े कदम

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लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन ने ट्रामा सेंटर में मरीजों की भीड़ को कम करने के लिए सरकारी अस्पतालों के रेफर मरीजों पर आंशिक ब्रेक लगा दी है। ब्रेक पूर्णतया नहीं है, केवल गंभीर मरीजों को भर्ती किया जायेगा अन्य को वापस बैरंग लौटा दिया जायेगा। उक्त संबन्ध में केजीएमयू प्रशासन ने बलरामपुर, सिविल व लोहिया सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल समेत समस्त सरकारी अस्पतालों को चिठठ्ी भेजी गई है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि केवल गंभीर मरीजों को, जिस बीमारी का उक्त अस्पताल में इलाज उपलब्ध न हो, उन्हें ही ट्रामा सेंटर के लिए रेफर किया जाये।

गौरतलब है कि प्रत्येक गंभीर मरीज को, गुणवत्ता युक्त इलाज मुहैय्या कराने के लिए केजीएमयू व ट्रामा सेंटर प्रशासन की कोशिशे लगातार जारी है। इसी क्रम में पूर्व में स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती करने पर रोक लगा दी गई थी। गैर गंभीर मरीजों की भीड़ को रोकने के लिए सरकारी अस्पतालों को पत्र भेजा गया है। चिठ्ठी के संबन्ध में बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ.राजीव लोचन का कहना है कि बलरामपुर अस्पताल की इमरजेसंी से केवल अति गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जाता है। रात को रोजाना 20 से 25 मरीजों की भर्ती होती है। बल्कि ट्रामा सेंटर से हमारे यहां 12 से 15 मरीज आते हैं। रात को अधिक रेफर करने के संबन्ध में उन्होंने कहा कि रात को संसाधन सीमित होते हैं, जान बचाने का तीमारदारों का दबाब अधिक होता है, इसलिए बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर रेफर कर सकते हैं।

डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आशुतोष कुमार दुबे का कहना है कि बेहतर इलाज प्राप्त करना मरीज का विशेषाधिकार है, अगर मरीज रेफर करने को बोल रहा है तो उसे जबरन रोका नही जा सकता है। इसके अलावा ट्रामा सेंटर या अन्य अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज को भर्ती कर इलाज देने की बाध्यता है। उच्च न्यायालय भी इलाज के मामले में हीलाहवाली को स्थान नही देता है। ट्रामा सेंटर प्रभारी प्रो.संदीप तिवारी का कहना है कि बिस्तरों की उपलब्धता तक हर मरीज को भर्ती किया जाता है। इसके बाद प्राथमिक उपचार कर अन्य अस्पताल भेजने की प्रक्रिया करना मजबूरी होती है।

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