अब जागा लोहिया संस्थान, इतने दिन जांच न होने पर लगेगा जुर्माना

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लखनऊ। गोमतीनगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान पैथोलॉजी जांच की व्यवस्था को चाक चौंबद करने जा रहा है। इसके तहत जांच में प्रयोग होने वाले रीजेंट खरीदने के बदले मुफ्त मशीन लगाने नियम में परिवर्तन करना है। नये नियमों के अनुसार जांच करने वाला उपकरण अगर 15 दिन से ज्यादा खराब रहता है, तो उस पर 2000 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगा दिया जाएगा। इस कार्रवाई में कोई कोताही बरती नही जाएगी।

लोहिया संस्थान की पैथोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी समेत दूसरे विभागों में जांच के लिए काफी संख्या में उपकरण लगे है। संस्थान में कंपनियों ने मुफ्त मशीनें लगा रखी हैं। इसके लिए यह शर्त है कि जांच के लिए रीजेंट उसी कंपनी से ही खरीदेंगे। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक उपकरणों के खराब होने और उसकी मरम्मत कराने को लेकर कोई ठोस रणनीति ही नही बनी थी। इस पर उपकरण खराब होने पर कंपनियां मनमर्जी उसे ठीक कराती थीं। इस दौरान जांच की वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर मरीज बाहर से जांच कराने को मजबूर होता था।

सबसे ज्यादा दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता था। मरीजों की दिक्कतों को दूर करने लिए संस्थान प्रशासन अब होश में आया है आैर नए नियम बना दिये है। इसके तहत साल में यदि कोई मशीन 15 दिन खराब रहती तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इससे अधिक दिन मशीन खराब रहती है तो 2000 रुपये प्रतिदिन जुर्माना वसूला जाएगा। लोहिया संस्थान के निदेशक का दावा है कि कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।

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