अन्तर्राष्ट्रीय इम्पलांटोलॉजी कांफ्रेस में जुटेगें दुनियाभर के डॉक्टर

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लखनऊ। एकेडेमी ऑफ ओरल इम्पलांटोलॉजी अपनी दसवीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन करने जा रही है। इस फोरम पर ओरल इम्पलांट टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुए ताजा घटनाक्रमों को शोकेस किया जाएगा। एकेडेमी ऑफ ओरल इम्पलांट के महासचिव डॉ अजय शर्मा ने इस आयोजन की जानकारी देते हुये बताया कि इस साल अगस्त में नई दिल्ली में हो रही इस कांफ्रेस में दुनियाभर से अनेक जाने माने डॉक्टर हिस्सा लेंगे। इनमें ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, इटली, दक्षिण कोरिया और स्पेन के डॉक्टर शामिल होंगे।

इस आयोजन में शामिल होने वाले डॉक्टर अपने देश में हुए नवीन आविष्कारों और टैक्नोलॉजियों से लोगों को परिचित कराएंगे। डेंटल इम्पलांट में टेटिनियम की एक जड़ को सर्जरी से मसूड़ों में जबड़े में लगा दिया जाता है। इससे डेंटिस्ट नया दांत या ब्रिज वहां लगा सकता है। यह इम्पलांट किसी डेंटचर की तरह खुला नहीं मिलता। डेंटल इम्पलांट से ओरल हैल्थ में भी मदद मिलती है क्योंकि इसमें ब्रिज की तरह नए दांत को दूसरे दांतों पर नहीं टिकाया जाता।

कुछ साल पहले तक उम्रदराज लोगों मं इम्पलांट करना करना जोखिम भरा माना जाता था क्योंकि यह धारणा थी कि 65 की उम्र के बाद जबड़े का आकार बदल जाता है और जख्म भरने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। मसूड़ों की बीमारियों से भी खतरा था जिससे इम्पलांट प्रभावित हो सकता था। हाल के अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि उम्रदराज लोगों के लिए भी इम्पलांट युवा मरीजों की तरह ही सफल होता है। इससे एक बड़ी आबादी के लिए नए दांत लगाने का रास्ता खुल गया है और उन्हें अतिरिक्त केयर की भी जरूरत नहीं है।

समझा जाता है कि उम्रदराज लोगों ने अगर इम्पलांट कराया है तो उन्हें नियमित रुप से डेंटल चेकअप कराना जरूरी है। एकेडेमी ऑफ ओरल इम्पलांट के महासचिव डॉ अजय शर्मा ने कहा-‘‘पिछले पांच दशक से इम्पलांट अस्तित्व में है। लेकिन हाल के दस वर्शों में इम्पलांट ने लोकप्रियता हासिल की है क्योंकि इससे मरीजों में कई प्रकार के विकार नहीं आते और उन्हें हैल्थकेयर में मदद मिलती है। इस समय की स्थिति यह है कि डेंटल इम्पलांट ने डेंटल इंडस्ट्री का स्वरुप बदल दिया है और बदलाव बहुत तेजी से आ रहे हैं। शुरू में इसे महंगा माना जाता था लेकिन अब डेंटल इम्पलांट को तरजीह जा रही है। हैल्थकेयर प्रोफेषनल और मरीज दोनों ही इसे प्रमुखता दे रहे हैं।

इम्पलांटोलॉजी में हो रहे नए घटनाक्रमों को देखते हुए अब मरीजों के सामने ढीले ढाले दांतों के बजाए मजबूती से टिके नए और खूबसूरत दांतों के विकल्प खुल गए हैं। हाल के वर्शों में डेंटल इम्पलांट टैक्नोलॉजी में जबर्दस्त उपलब्धियां हासिल हुई हैं। नए सिस्टम, बेहतर मेटेरियल और सर्जिकल टैक्नोलॉजी ने डेंटल प्रोफेषनलों के लिए नए और व्यापक अवसर खोल दिए हैं और वे ताजा इनोवेषन उपयोग कर पा रहे हैं।

ओरल इम्पलांटोंलॉजी में कम्पनियों की भूमिका के बारे में डॉ अजय शर्मा ने कहा कि ओरल इम्पलांट मं विषेशज्ञता रखने वाली कम्पनियां सघन रिसर्च पर जोर दे रही हैं ताकि बेहतर और दीर्घकालिक प्रोडक्ट विकसित किए जा सकें और यही एक खासियत है जो एक डॉक्टर अपने मरीज को दे सकता है। कम्पनियां अपने प्रोडक्ट में दीर्घकालिक स्थायित्व और टैक्नोलॉजी के लिहाज से उन्नत विकल्प खोज रही हैं ताकि डेंटल केयर में मरीजों को बेजोड़ संतुश्टि दी जा सके। मेडिकल औजार और उपकरण तथा प्रोडक्ट कम्पनियां ऐसे टैक्नोलॉजी पर फोकस कर रही हैं जो डॉक्टरों के लिए उच्चतम मेडिकल केयर देने मे मददगार साबित हों।

वे डेंटल इम्पलांट, प्रोस्थेटिक एलीमेंट्स और सर्जिकल टूल्स की नई रेंज भी पेष कर रही हैं। उनकाध्यान आवष्यक बैक अप्स और व्यापक ट्रेनिंग प्रोग्राम है जिनकी हैल्थकेयर प्रोफेषनल्स के बीच व्यापक स्वीकार्यता हो। एकेडेमी ऑफ ओरल इम्पलांट के महासचिव डॉ अजय शर्मा ने कहा-‘‘एओआई हर साल ऐसा आयोजन करती है जिसमें दुनियाभर से हिस्सेदारी, योगदान हो और डेंटिस्ट्री की युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा मिले। अनुभवी प्रोफेषनल अपनी विषेशज्ञता का साझा युवाओं के बीच करते हैं और इससे दुनियाभर में ज्ञान का प्रसार होता है। मेडिकल कम्पनियां भी इन मंचों की ओर जाकर अपने प्रोडक्ट षोकेस करती हैं। एकेडेमी ऑफ ओरल इम्पलांटोलॉजी की दसवीं कांग्रेस का आयोजन नई दिल्ली के द ग्रैंड में अगस्त, 2018 किया जाएगा।

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