लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में कर्मचारियों व मेडिकोज के बीच भले ही आमने-सामने की लड़ाई को शांत करा दी गयी है, लेकिन अभी लगातार दोनों पक्षों के समर्थन में विभिन्न संगठन एक दूसरे पर कार्रवाई करने के लिए आतुर है। मुख्यमंत्री से लेकर शासन प्रशासन तक ज्ञापन भेज कर कार्रवाई की मांग की जा रही है। बृहस्पतिवार को केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन ने कार्रवाई की मांग थी, तो आज राज्य कर्मचारी परिषद ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया सात जून को केजीएमयू में दौरान कुछ मेडिकाज ने महिला व कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट की किया गया। केजीएमयू प्रशासन द्वारा घटना पर विशेष ध्यान न देने पर अगले दिन पुनः उन्ही कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई , जिसकी जानकारी पाते ही के जी एम यू कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष ,महामंत्री व अन्य पदाधिकारी मौके पर पहुचे, परंतु छात्रों द्वारा उन्हें भी मारा पीटा गया, जिसमे अध्यक्ष महामंत्री गम्भीर रूप से घायल हो गए और अन्य पदाधिकारियों द्वारा उन्हें प्राथमिक उपचार हेतु ट्रामा सेन्टर में भर्ती कराया गया । इससे आक्रोशित कर्मचारियों ने कार्य बंद कर दिया।
इस घटना को देखते हुए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा , कुलसचिव से वार्ता बैठक की गयी, जिसमे संघ के पदाधिकारी , स्थानीय प्रशासन व जिला प्रशासन के अधिकारी सम्मिलित हुए। बैठक में सहमति बनी और आंदोलन को तत्काल समाप्त करवाया गया । परन्तु जो विवाद उसी दिन समाप्त हो चुका है उसके संबंध में के जी एम यू टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव द्वारा दिया गया बयान चिकित्सा विश्विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, छात्रों व कर्मचारियों के बीच वैमनस्यता को बढ़ावा दे रहा है। यदि टीचर्स एसोसिएशन निष्पक्ष होती तो कुछ ही दिन पूर्व जूनियर डाक्टरो द्वारा भी हड़ताल की गई थी, तो उसका भी विरोध करना चाहिए था। ट्रामा सेंटर जैसे संवेदनशील स्थान पर वरिष्ठ डाक्टरों की इमरजेंसी होती है, वे अपने कार्यस्थल से गायब रहते हैं। इसके बाद भी कर्मचारी लगातार मरीजो की सेवा करते रहते हैं ।
परिषद ने चेतावनी दी है कि किसी भी कर्मचारी के साथ प्रशासन द्वारा कोई उत्पीड़नात्मक कार्यवाही की जाती है तो आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे , जिसमे प्रदेश का चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा , प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, रोडवेज, वन , गन्ना ,परिवार कल्याण, सिचाई ,कृषि, ग्राम विकास ,व्यापार कर सहित अन्य विभाग प्रभावित होंगें। परिषद ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से अपील की है कि वे उक्त प्रकरण में स्वयं हस्तक्षेप कर शासन द्वारा निष्पक्ष जाँच कराये।
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