लखनऊ। गठिया रोग, टीबी रोग, कबूतर के पंख, पालतू जानवरों की रूसी ड्रग्स के अलावा फफूंद आदि श्वसन के बीमारियां डिफ्यूज पैरनकाईमल लंग डिजीज (आईएलडी) के कारण हो सकते है। इस बीमारी के होने पर मरीज को श्वसन की समस्या के साथ जोड़ों में दर्द भी हो सकता है। विशेषज्ञों का दावा है कि आईएलडी बीमारी के लक्षणों की पहचान कर उसका इलाज भी सटीक इलाज भी तलाश किया जा रहा है। परन्तु यह बीमारी होने के कारणों व अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों पर शोध चल रहा है। यह जानकारी पीजीआई चण्डीगढ़ चेस्ट रोग विशेषज्ञ प्रो. डी बेहरा ने दी। होटल क्लार्क अवध में आयोजित आईएलडी बीमारी पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रो. राजेद्र प्रसाद, डा. टी पी सिंह के अलावा एरा मेडिकल कालेज के कुलपति प्रो. अब्बास अली सहित अन्य वरिष्ठ डाक्टर मौजूद थे।
प्रो. बेहरा ने बताया कि आईएलडी की इस पहचान आसानी से हो जाती है। कुछ 20 प्रतिशत बीमारियों का इलाज भी संभव है, परन्तु इस बीमारी के होने के सभी कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि जो जानकारियां मिली है उनमें कबूतर के पंख, बीट, जानवरों के बालों पर पाए जाने वाले रूसी ड्रग्स, फफूंद एवं वातावरणीय प्रदूषण आदि प्रमुख होती है। इसकी पहचान और बीमारी की गंभीरता को बढ़ाने के लिए डॉक्टरों में जागरूकता बढ़ानी है, क्योंकि जागरूकता के अभाव में आज भी 67 प्रतिशत आईएलडी मरीजो को टीबी की दवा दी जा रही हैै। उन्होंने बताया कि यह बीमारी भारत ही नहीं पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। भारत में बीते दो साल की ओपीडी में 800 मरीज पंजीकृत किये हैं, जबकि तमाम संबन्धित अस्पताल पहुंच ही नहीं पाते हैं। इस अवसर पर केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भटट् की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि डॉ. डी. बेहरा ने डॉ. सूर्यकांत की पुस्तक हैण्ड बुक ऑफ आईएलडी का विमोचन किया। इस अवसर पर एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली, केजीएमयू के अन्य चिकित्सक मौजूद थे।
आयोजन सचिव और एरा मेडिकल कालेज के पल्मोनरी मेडिसिनि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि इस बीमारी ने अपनी दस्तक तेज कर दी है, अमेरिका से आने वाली इस बीमारी में पहले एक लाख आबादी में 30 लोग बीमार होते थे हलांकि अब यह सं या कम हो गई है। आबादी बढ़ने की वजह से रोगियों की सं या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यह रोग अन्य बीमारियों की दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में भी हो जाती है। इसलिए अगर आपकों कुछ जीने चढ़ने पर सांस फूलने लगती है और सूखी खांसी आती है, तो तुरन्त एलर्ट हो जाईये और विशेषज्ञ से इलाज ले अन्यथा एक समय स्थिति बहुत खराब हो जाती है।
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