लखनऊ । इटली की डॉ. मारसेलो ने बताया कि अगर महिला को माहवारी के समय पेशाब या स्टूल पास करने में दर्द महसूस हो तो सतर्क हो जाएं। इसके अलावा अगर माहवारी के दौरान ब्लीडिंग ज्यादा हो या असहनीय दर्द लगातार बना रहता हो तो यह लक्षण एंडोमीट्रिओसिस के हो सकते हैं। इसमें खास बात यह होती है कि पेशाब या एनस के आसपास मस्से बनने लगते हैं आैर आगे जाकर यह पेशाब के रास्ते पर झिल्ली बनने लगती है। इससे माहवारी के समय दर्द, सेक्सुअल इंटरकोर्स के समय दर्द व यूरीन पास करते समय दर्द भी हो सकता है। इसके अलावा अगर पेशाब के रास्ते से खून आए तो तत्काल परामर्श लेना चाहिए। कुछ मरीजों के यूट्रस या ओवरी की जांच में दस से ज्यादा गांठे मिलती हैं। यह मल्टीपल सिस्ट होने के कारण सर्जरी ही कारगर इलाज है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मल्टीपल गांठ निकालने के सर्जरी में हैंड मूवमेंट नहीं कर पाता है। ऐसे में इसके लिए रोबोटिक सर्जरी का भी विकल्प सबसे अच्छा है। रोबोटिक सर्जरी में एंडोस्कोपिक तकनीक सर्जरी की जाती है। यह सर्जरी फिलहाल अब तक दिल्ली व मुंबई जैसे बड़े शहरों में ही की जा रही है। यह जानकारी इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट की अध्यक्ष डॉ. रिषमा ढिल्लन पाई ने शनिवार को एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन पर आयोजित कार्यक्रम में दी। होटल क्लार्क अवध में आयोजित कार्यक्रम में अन्य विशेषज्ञों ने भी लेप्रोस्कोपी तकनीक से की जाने वाली सर्जरी की जानकारी दी।
डा. रिषमा ढिल्लन ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से ओवरी में मल्टीपल गांठों को बेहतरीन तरीके से निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह रोबोटिक बेहद कारगर है। कम समय में हाईटेक सर्जरी कही जा रही है। इसमें मरीज को दिक्कत भी बहुत होती है। कार्यशाला में एसोसिएशन के सचिव मुंंबई के डॉ. एस कृष्णा क ुमार ने बताया कि महिलाओं में एंडोमीट्रिओसिस की दिक्कत बढ़ना आम होती जा रही है। इसे हिस्ट्रोस्कोपी के माध्यम से इसका इलाज संभव है, परन्तु सावधानी बरती जाए जो इससे बचा भी जा सकता है। उन्होंने बताया कि जो महिलाएं शिशु को स्तनपान नहीं करातीं उनमें यह समस्या अधिक होती है। ऐसी महिलाओं में एस्ट्रोजेन की मात्रा अधिक होती है। इस कारण हार्मोनल चेंज होने लगते है।
इटली से आयी डॉ. मारसेलो ने बताया कि अगर महिला को माहवारी के समय पेशाब या स्टूल पास करने में दर्द महसूस हो तो सतर्क हो जाएं। इसके अलावा अगर माहवारी के दौरान ब्लीडिंग ज्यादा हो या असहनीय दर्द लगातार बना रहता हो तो यह लक्षण एंडोमीट्रिओसिस के हो सकते हैं। इसमें खास बात यह होती है कि पेशाब या एनस के आसपास मस्से बनने लगते हैं आैर आगे जाकर यह पेशाब के रास्ते पर झिल्ली बनने लगती है। इससे माहवारी के समय दर्द, सेक्सुअल इंटरकोर्स के समय दर्द व यूरीन पास करते समय दर्द भी हो सकता है। इसके अलावा अगर पेशाब के रास्ते से खून आए तो तत्काल परामर्श लेना चाहिए।
एसोसिएशन की सचिव डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि एंडोस्कोपिक विधि न केवल महिलाओं में कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर है। इस विधि से फैलोपियन ट्यूब में होने वाली प्रेग्नेंसी के इलाज में भी यह सफल है। उन्होंने बताया कि कई बार ट्यूब में संक्रमण, सर्जरी या अन्य कारणों से एग यूट्रस नहीं पहुंच पाते। वो ट्यूब में ही फर्टिलाइज हो जाते हैं। ऐसे में इसके इलाज में भी लैप्रोस्कोपिक विधि कारगर है।
अब PayTM के जरिए भी द एम्पल न्यूज़ की मदद कर सकते हैं. मोबाइल नंबर 9140014727 पर पेटीएम करें.
द एम्पल न्यूज़ डॉट कॉम को छोटी-सी सहयोग राशि देकर इसके संचालन में मदद करें: Rs 200 > Rs 500 > Rs 1000 > Rs 2000 > Rs 5000 > Rs 10000.












