आईसीयू में संक्रमण का नियंत्रण आवश्यक

0
741

लखनऊ। क्रिटकल केयर यूनिट में बढ़ते संक्रमण को नियंत्रण करने के लिए गाइड लाइन बनायी जानी चाहिए। वर्तमान में इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) के अंदर संक्रमण से होने वाली दिक्कतों से सभी विशेषज्ञ निदान चाहते है आैर मरीजों को जल्द से जल्द स्वस्थ्य देखना चाहते है। इसके लिए सभी विशेषज्ञों को एक जुट होकर अपना परामर्श देना होगा। यह जानकारी आईएससीसीएम की शाखा लखनऊ क्रिटकल केयर सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पीजीआई के प्रो. आर के सिंह ने दिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आईसीयू के अलावा एंटीबायटिक के मल्टी ड्रग रजिस्टेंस पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से आईएससीसीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. यतिन मेहता भी मौजूद थे।

डा. सिंह ने कहा कि सभी अस्पतालों के आईसीयू में संक्रमण बढ़ता जा रहा है। इसको कंट्रोल कैसे किया जाए। इसके लिए क्रिटकल केयर सोसायटी प्रयासरत है अौर विशेषज्ञ डाक्टर लगातार कवायद कर रहे है। संक्रमण पर कंट्रोल के लिए गाइडलाइन को बनाये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए आज क्रिटकल केयर के विशेषज्ञ एकत्र हुए है। आईएससीसीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. यतिन मेहता के कहा कि क्रिटकल केयर में आंकड़े एकत्र किये जाने की आवश्यकता है, ताकि जल्द से जल्द होने वाले संक्रमण से निजात पायी जा सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का भी सख्ती से पालन करना होगा। डा. के एन प्रसाद ने कहा कि आईसीयू में आने वाले मरीजों में मल्टी ड्रग रजिस्टेंस मिल रहा है। इस पर भी विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।

क्रिटकल केयर विशेषज्ञ डा. बी पी सिंह ने कहा कि आईसीयू में काफी संख्या में ऐसे मरीज भी आते है, जिनमें जल्दी कोई एंटीबायटिक असर ही नहीं करती है। ऐसे में मरीज का इलाज करने में दिक्कत ही नही आती है। बल्कि उसके इलाज में विशेष सावधानी रखनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक के प्रयोग में सावधानी बरतनी होगी। मरीजों को एंटीबायटिक मल्टी ड्रग रजिस्टेंस बढ़ रहा है। कई ऐसे कारण है कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। फोर्टीज हास्पिटल दिल्ली के डा. राहुल ने भी मल्टीपल रजिस्टेंंस पर चर्चा की।

अब PayTM के जरिए भी द एम्पल न्यूज़ की मदद कर सकते हैं. मोबाइल नंबर 9140014727 पर पेटीएम करें.
द एम्पल न्यूज़ डॉट कॉम को छोटी-सी सहयोग राशि देकर इसके संचालन में मदद करें: Rs 200 > Rs 500 > Rs 1000 > Rs 2000 > Rs 5000 > Rs 10000.

Previous articleडीएनबी पाठ्यक्रम यहां भी शुरु
Next articleसेक्सुअल इंटरकोर्स में दिक्कत है तो इस बीमारी की आशंका

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here