लखनऊ। चोट लगने के बाद उसका एक हाथ बेजान हो गया था। उससे कोई भी काम नहीं हो पाता था। डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद भी हाथ में क्रियाशीलता नहीं आयी। इस मरीज को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्लॉस्टिक सर्जरी विभाग में युवक को भर्ती किया गया। यहां पर शुक्रवार को प्लॉस्टिक सर्जरी विभाग के स्थापना दिवस समारोह के पहले से चेन्नई के मशहूर प्लॉस्टिक सर्जन डॉ. के श्रीधर की मदद से सफल ऑपरेशन करने में कामयाबी हासिल की है। इस सर्जरी के बाद बेजान हाथ क्रियाशील हो गया है।
शनिवार को प्लॉस्टिक सर्जरी विभाग का 42 वां स्थापना दिवस समारोह मनाया जाएगा। शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में विभाग प्रमुख डॉ. एके सिंह ने बताया कि डॉ. के श्रीधर के साथ आज कई मरीजों के ऑपरेशन किए गए। इसमें बस्ती निवासी 22 साल से युवक का सर्जरी की गयी। चोट लगने के बाद उसका बायां हाथ काम नहीं कर रहा था। जांच में पता चला कि उसके बांह के समीप से गयी रेडियल नर्व चोट लगने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। समय पर सही इलाज न होने से धीरे- धीरे हाथों की ताकत चली गई। उन्होंने बताया कि सर्जरी में कर रेडियल नर्व को जोड़ दिया गया। उन्होंने बताया कि तीन से चार महीने में हाथ फिर से क्रियाशील हो जाएगा।
इसी प्रकार एक अन्य केस में 12 साल के बच्चे हाथ में चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने प्लास्टर चढ़ाया, परन्तु कोहनी के पास से प्लास्टर चढ़ाया गया था। इस कारण हड्डी तो जुड़ गई लेकिन खून की दौड़ान सही होने से उंगलियां आपस में सिकुड़ गईं थी। आपरेशन के दौरान सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को ठीक कर दिया अब उंगलियां फिर से काम करेंगी। उन्होंने बताया कि एक मरीज की हाथ में बीच की उंगली बेतरतीब बढ़ गई थी। उसको ऑपरेशन कर आकार दिया गया।
डॉ. सिंह ने बताया कि केजीएमयू में 25 बेड की बर्न यूनिट बनकर तैयार है। इसमें आठ बेड आईसीयू व आठ बेड पोस्टऑप आईसीयू के हैं। चार ऑपरेशन थिएटर हैं। महिला समाज कल्याण ने बर्न यूनिट के लिए करीब नौ करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। यूनिट बनकर तैयार है। यूनिट के संचालन के लिए डॉक्टर, पैरामेडिकल व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भर्ती होनी है। करीब 250 डॉक्टर व कर्मचारियों की जरूरत है। जल्द ही अनुमति मिलने की उम्मीद है।
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