डेस्क। प्रदेश की एड्स जेलों में इस कदर फैलेगा। यह किसी ने नहीं सोचा होगा। गोरखपुर, मेरठ और गाजियाबाद की जेलों में एड्स रोगी मिलने के बाद इटावा जेल में नौ और बुलंदशहर में पांच कैदी एड्स से ग्रस्त पाये गये हैं। जेलर मुकेश कटियार ने कहना कि स्वास्थ्य जांच में यहां जेल में बंद नौ कैदियों में एड्स के लक्षण पाये गये है। इन सभी को सैफई एंटीरेटोरल वायरल थिरेपी द्वारा सैफई मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में इलाज शुरू करा दिया गया है। जेल में जो एड्स रोगी मिले हैं उनमें छह विचाराधीन तथा दो सिद्धदोष बंदी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि जेल में बंदियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वैसे तो जेल में एचआईवी पाजिटिव मरीजों की संख्या 17 थी लेकिन इस बीमारी से ग्रसित नौ बंदी छूट चुके हैं जबकि अभी भी नौ बंदी जेल में मौजूद हैं। बुलन्दशहर के जेल अधीक्षक ओपी कटारिया ने बताया कि मेडिकल परीक्षण के दौरान पांच कैदियों में एवचआईवी पॉजिटिव के लक्षण पाऐ गये हैं।
गौरलतब है कि इटावा में वर्ष 2003 से अब तक 1700 से अधिक एचआईवी पाजिटिव मरीज जिले में मिल चुके हैं। जिला एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से मार्च 2016 में जेल के बंदियों की एचआईवी जांच कराई गई थी। इस जांच में 14 बंदी एचआईवी पाजिटिव पाए गए थे। वर्ष 2017 में भी बंदियों की जांच की गई। जांच के दौरान जुलाई के महीने में दो तथा अगस्त के महीने में एक पाजिटिव केस पाया गया। दो वर्षों में 17 बंदी बंदी एचआईवी पाजिटिव पाए गए थे। इन बंदियों का सैफई एंटीरेटोरल वायरल थिरेपी के द्वारा सैफई के एआरटी सेंटर में इलाज चल रहा है। जो 17 बंदी पाजिटिव निकले थे। उनमें से नौ बंदी जिला जेल से छूट चुके हैं। वर्तमान में आठ बंदी जो पाजिटिव हैं।
डेप्को की जिला प्रबंधक साक्षी तिवारी का कहना है कि इटावा जेल में नौ बंदी अभी एचआईवी पाजिटिव हैं। उन्होंने बताया कि इन बंदियों का सैफई एआरटी सेंटर से इलाज चल रहा है और उन्हें प्रत्येक महीने एआरटी सेंटर से दवा मंगाकर उपलब्ध कराई जाती है। उनकी टीम में शामिल पर्यवेक्षक अजय कौशल, एमएनडी अभिषेक कुमार व अन्य टीम के सदस्य शनिवार को जाकर बंदियों की जांच करते हैं।
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