लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और विश्व गुर्दा दिवस पर बृहस्पतिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गुर्दे की बीमारी से निपटने के लिए’ किडनी डिजीज प्रिवेंशन प्रोजेक्ट “शुरू कर रहा है, इसका उद्ेश्य तेजी से फैल रही क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की महामारी के फैलने पर रोक लगाना है। आईएमए के महासचिव डॉ. आरएन टंडन के मुताबिक, क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के दो तिहाई मामले मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण होते हैं। शहरी भारत के युवा आबादी में मधुमेह और उच्च रक्तचाप दोनों की मौजूदगी 20 फीसदी की दर से बढ़ी है।
देश में किडनी रोग के मामले भी पिछले एक दशक में लगभग दोगुना हो चुके हैं। इसके आगे भी इसके तेजी से बढ़ने की आशंका है। उन्होेंने कहा कि सीकेडी बढ़ने का खतरा महिलाओं में भी पुरूषों की तरह ही है। हालांकि पुरुषों की संख्या के मुकाबले डायलिसिस कराने वाली महिलाओं की संख्या कम है। संगठन का मानना है कि महिलाओं पर विशेष ध्यान देने से किसी भी योजना को बड़ी कामयाबी मिल सकती है क्योंकि वे परिवारों, खानपान की आदतों और संस्कृति परिवर्तन का आधार होती हैं, इसलिए इस मुहिम में महिलाओं को सबसे महत्वपूर्ण भागीदार बनाया गया है।
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