लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर में एक बार जिंदा मरीज को मृत घोषित करने का आरोप डाक्टरों पर लगा है। तीमारदारों का आरोप है कि न्यूरो सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने एक्सीडेंट में घायल मरीज को इलाज के बाद डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि परिजनों ले जाते वक्त देखा तो मरीज की सांसे चल रही थी। इसकी जानकारी देते हुए परिजनों ने हंगामा मचा दिया। इस पर भी डाक्टरों ने ब्लड की जांच तो करायी आैर एम्बुबैग व ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने लगे ,लेकिन बाद में आयी ब्लड की जांच को देखा तक नही। मरीज की मौत पांच घंटे बाद हो गयी। सेंटर प्रभारी डा. संदीप तिवारी का कहना है कि न्यूरो सर्जरी विभाग के डाक्टरों के अनुसार मरीज का ब्रोन डेड हो चुका था आैर परिजन उसे ले नहीं जा रहे थे।
बेटे जितेद्र कुमार के अनुसार उनके पिता केवल की 16 तारीख को एक्सीडेंट हो गया था। उसके बाद उन्हें ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। यहां पर डाक्टरों ने इलाज शुरू करके सीटी स्कैन आदि जांच करायी आैर हालत काफी गंभीर बतायी थी। उनका आरोप है कि डाक्टरों ने अगले दिन आकर कहा था कि मरीज को घर ले जाअों बचना मुश्किल है। परिजनों का कहना था कि इलाज करते हो सकता है हो सकता है ठीक हो जाए। उनका कहना है कि उस वक्त मरीज के ग्लूकोज की बोतल लगा दी गयी आैर एम्बुबैग चलाते रहने के लिए कहा गया।
बेटे जितेन्द्र कुमार ने बताया कि कल शाम को अचानक डाक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया आैर उसके बाद घर ले जाने के लिए कह दिया। उनका कहना है कि मरीज का पल्स व हार्टबीट को देखा गया तो दोनों चल रहे थे। इसके बाद डाक्टरों से कहा गया तो उन्होंने ब्लड जांच कराने के लिए भेज दिया गया। इस बीच मरीज के एम्बुबैग लगा दिया आैर कहा गया अक्सर मरीजों को हार्टबीट आ जाती है। परिजनों का आरोप है कि डाक्टर ब्लड जांच रिपोर्ट आने के बाद भी नहीं देखा। पांच घंटे बाद मरीज की मौत हो गयी।
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