लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर के डाक्टरों पर इलाज में लापरवाही करने का आरोप तो लगा ही है साथ ही इलाज सम्बधी फाइल गायब करने का भी आरोप लगा है। बच्चे के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाने वाले आहत पिता का कहना है कि मौत के बाद उसका मृत्यु प्रमाण भी नहीं दिया जा रहा है। उल्टे फटकार लगाते हुए कहा जा रहा है कि जब ट्रामा सेंटर में इलाज ही नहीं हुआ तो प्रमाण पत्र कैसे दे दे। परेशान पिता ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेज कर न्याय की फरियाद की है।
गोमतीनगर स्थित खरगापुर निवासी सात वर्षीय बेटा राघवेन्द्र 30 जनवरी को हाइटेंशन लाईन की चपेट में आने के बाद घायल हो गया था, आनन-फानन में परिजन बच्चे को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे थे। वहां पर इमरजेंसी में इलाज के बाद डाक्टरों ने सिविल अस्पताल रेफर कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि सिविल अस्पताल में डाक्टरों की लापरवाही से परेशान होकर मरीज को ट्रामा सेंटर में भर्ती करा दिया था। पिता अवधेश कुमार के मुताबिक बच्चे की हालत में सुधार होने लगा था ,लेकिन तीन फरवरी की रात अचानक से तबीयत बिगडने पर बेटे को इमरजेंसी में शिफ्ट कर किया गया। वहां मौजूद डाक्टर रात भर सीनियर डाक्टर को कॉल किये ,लेकिन कोई भी सीनियर डाक्टर देखने नहीं है, जिसके कारण 4 फरवरी की सुबह 5 बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया।
उसके बाद परिजन बेटे का शव लेकर घर चले गये। पिता अवधेश कुमार का आरोप है कि पांच फरवरी को बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र लेने ट्रामा सेंंटर पहुंचे, तो वहां पर कर्मचारियों की बात सुनकर कर ही चक्कर खा गये। उनका आरोप था कि मरीज का इलाज ही ट्रामा सेंंटर में नहीं हुआ है। मरीज को लामा यानी बिना बताये ही लेकर चले गये थे। मरीज की मौत कहीं आैर हुयी है। यहां से मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा। कई बार कहने पर कर्मचारियों ने उन्हे फटकार लगाकर भगा दिया। उनकी परेशानी को विभाग के डाक्टर भी सुनने को तैयार नहीं है। इसके बाद अपने इकलौते बेटे की मौत से परेशान पिता ने अब जिलाधिकारी से न्याय की फरियाद की है आैर जल्द ही कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
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