लखनऊ। गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने नेफ्रान रिपेयरिंग तकनीक से कैंसर संक्रमित किडनी का जटिल सर्जरी करने में कामयाबी पायी है। विशेषज्ञों ने इस तकनीक से सिर्फ किडनी के ट्यूमर वाले हिस्से को ही निकाला गया। लोहिया संस्थान में सर्जिकल अंाकोलॉजी विभाग में इस तकनीक से पहली बार सर्जरी की गयी है।
विशेषज्ञों के अनुसार गोंडा रहने वाले रमेश सिंह (65) को लम्बे समय से पेट में दर्द से परेशान रहता था। इसके साथ ही उसे पेशाब में खून आने की शिकायत बनी हुई थी। रमेश के अनुसार कमर से ऊपरी पीठ में भीषण दर्द हो था। इसके कारण पीठ में सूजन भी आ गयी थी। कई स्थानीय अस्पतालों व कई डॉक्टरों दिखाने के बाद एक डाक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराई। इस जांच में गुर्दे में गांठ का पता चला।
इसके बाद परिजनों नें लोहिया संस्थान की ओपीडी में रमेश को डाक्टर को दिखाया। सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष सिंघल के निर्देशन में इलाज शुरू किया गया। डॉ. सिंघल ने ट¬ूमर की पुष्टि व पोजीशन को देखने के लिए रमेश की सीटी एंजियोग्राफी कराई। इस जांच में बाई किडनी के निचले हिस्से में कैंसर की पुष्टि हुई, तो डाक्टरों ने सर्जरी करने का निर्णय लिया।
इस सर्जरी में डा. आशीष सिंघल ने सर्जरी के लिए पीठ के नीचे हिस्से में करीब 10 सेंटीमीटर का चीरा लगा कर कैंसर संक्रमित किडनी के भाग को सर्जरी कर बाहर निकाल दिया। किडनी को पूरी तरह मोबलाइज कर आस-पास जगह बनाई। इसके बाद आर्टरी में आ रहे ब्लड के फ्लो (प्रवाह) को रोका गया। फिर किडनी पर कवर चढ़ाकर उस पर विशेषज्ञ प्रकार से आइस स्लस लगाया। इससे किडनी सिकुड़ कर छोटी हो गई। इसके बाद ट¬ूमर को निकाल दिया गया। अभी तक यहां रेडिकल नेफ्रेक्टमी होती थी, जिसमें मरीज की किडनी ही निकालनी पड़ जाती थी।
डॉ. सिंघल ने बताया कि अभी तक कई बार गुर्दे का कैंसर सर्जरी करने के बाद दोबारा पनपने का खतरा रहता है। ऐसे में मरीज की दोनों गुर्दे निकालने पड़ जाते हैं। इस तकनीक में सिर्फ कैंसर संक्रमित हिस्सा निकाल कर मरीज का गुर्दा बचा लिया गया।
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