लखनऊ। बच्चों के बेवजह जांच नहीं करानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक रेडिएशन से ब्लड कैंसर बीमारियों का आशंका अधिक हो जाती है। बच्चों में 90 प्रतिशत जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कारगर जांच होती है। इस जांच के माध्यम से काफी या अन्य जटिल बीमारियों को पकड़ा जा सकता है। इस जांच में रेडिएशन कम निकलता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉ. अनित परिहार ने कलाम सेंटर में वल्र्ड रेडियोग्राफी डे पर आयोजित कार्यशाला में दी।
उन्होंने बताया कि कोई भी जांच हो बिना विशेषज्ञ के परामर्श के नहीं कराना चाहिए। खास कर अगर जरूरत न हो तो बच्चों की अधिक रेडिएशन वाली जांच बिल्कुल नहीं करानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई रेडिएशन फिक्वेंसी के संपर्क में आने पर ब्लड कैंसर के अलावा दूसरी जटिल बीमारियां भी जकड़ सकती है। उन्होंने ब्रोन स्ट्रोक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हर साल करीब 15 लाख लोग को ब्रोन स्ट्रोक पड़ता है। इसमें एक तिहाई मरीजों की समय पर उपचार न मिलने से मौत हो जाती है, जबकि इलाज में इतना देर हो जाती है कि जो मरीज सही समय पर उपचार मिलने पर ठीक हो जाते हैं वह अपनी सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं। केजीएमयू के डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि ब्रोन स्ट्रोक का इलाज अब पैर के जरिए संभव हो चुका है। दिमाग के किसी भी हिस्से में खून जमा हो तो स्टैंट रीट्रीवर डिवाइस को पैर की नस में डाला जाता है। जिससे यहां से जमे खून को बाहर निकाला जाता है। इसे मैक्निकलथ्रो बोलासिस कहते हैं।












