लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में छह महीने पहले भीषण आग लगी थी। मरीजों को बचाने में अधिकारियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। कई दिनों तक ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित थी। घटना के बाद अब केजीएमयू प्रशासन लगातार आग से बचाव के उपाए पर चर्चा कर रहा है। अब उसने संसाधन व मैन पावर न होने पर आग पर नियंत्रण पाना मुश्किल बताया है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि आग से बचाव के लिए वार्डों में 15 मीटर पर एक फायर एस्टिंग्यूसर लगाए जाएंगे। अभी काफी विभागों में फायर एस्टिंग्यूसर लगे हैं। जिन स्थानों पर इसकी कमी है उसे पूरा किया जाएगा। कितने फायर एस्टिंग्यूसर लगाए जाने हैं उसकी गिनती 15 दिन के भीतर इंजीनियर बब्लू सिंह को करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि शताब्दी फेज-वन, फेज-टू समेत दूसरे भवनों में रैंप बनाए जाएंगे।
डॉ. विजय कुमार ने बताया कि केजीएमयू में फायर सेफ्टी ऑफिसर की तैनाती नहीं है। यहां पर फायर इंजीनियर भी नहीं है। इन दोनों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिख जाएगा। ये दोनों अफसर समय-समय पर मॉकड्रिल करेंगे। डॉक्टर व कर्मचारियों को फायर फाइटिंग सिस्टम के संचालन के प्रति जागरुक करेंगे।
आग बुझाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को दुरुस्त किया जाएगा। फायर हाइडेंड और अलार्म को भी जल्द ही ठीक कराया जाए। केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि चार हजार से ज्यादा बेड हैं। मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक जिन विभागों में फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं उनकी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।












