लखनऊ। कैंसर के इलाज के मामले में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की स्थिति ज्यादा खराब है। प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में ज्यादातर कैंसर पीड़ित महिलाये काफी देर से पहुंचती हैं, देर से इलाज के लिए पहुंचने पर 25 प्रतिशत ही महिलाएं में ठीक होने की उम्मीद होती हैं। इसके विपरीत जो महिलायें कैंसर के पहले स्टेज में आती हैं,उनमें से 85 प्रतिशत ठीक हो जाती है। पहली स्टेज में पहुंचने वाली महिलाओं के इलाज के दौरान कैंसर जैसी घातक बीमारी का भी पूरा इलाज संभव होता है। यह जानकारी चकगजरिया स्थिति कैंसर संस्थान की गाइनी कैंसर सर्जन डा.सबूही कुरैशी ने रविवार को आयोजित एसोसिएशन ऑफ गाइनकोलॉजिकल ऑनकोलॉजिस्ट की प्रदेश शाखा द्वारा आयोजित कार्यशाला में कही। कार्यशाला में अन्य विशेषज्ञों ने बच्चेदानी, स्तन कैंसर सहित महिलाअों की अन्य बीमारियों के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट भी मौजूद थे।
डा.सबूही कुरैशी ने बताया कि यदि महिलायें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं रहती है। अगर यह समय-समय पर चिकित्सक की सलाह पर जांच कराती रहें तो स्तन,गर्भाशय व अंडाशय के कैंसर से बचाव हो सकता है। उन्होंने बताया कि समय -समय पर जांच कराने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि किसी महिला को कैंसर हो रहा होगा,तो जितनी जल्दी पता चलेगा,उसके सही होने का मौका उतना ज्यादा होगा। इसके अलावा डा.सबूही कुरैशी ने बताया कि यदि किसी महिला को रक्तस्त्राव सामान्य से अधिक हो रहा हो,माहवारी बंद होने के बाद हो रहा हो या फिर गंदा पानी आ रहा हो, तो उन्हें बिना देरी किये विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में
कैंसर पीड़ित मरीजों का इलाज अत्याधुनिक तकनीक रोबोटिक सर्जरी,सिंकाई तथा कीमोथैरपी के माध्यम से किया जा रहा है।
ग्वालियर से आये डा.एसबीएल.श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में ब्रोस्ट व यूट्रस तथा ओवरी में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। जिसमें सेे ब्रोस्ट कैंसर के रोगियों की संख्या काफी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि आंकड़ों की माने तो दो ब्रोस्ट कैंसर के रोगियों में से एक की मौत इलाज के दौरान हो जाती है। इसका मुख्य कारण कैंसर का देरी से पता चलना है। उनहोंने बताया कि हमारे देश में हमारे देश में 40 प्रतिशत जनसंख्या सही इलाज के लिए संस्थान पहुंच ही नहीं पाती हैं। इस बीमारी को कम करने का एक मात्र तरीका जागरुकता है ताकि लोग लक्षण मिलते ही इलाज के लिए जा सके।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केजीएमयू के कुलपति प्रो.एमएलबी भट्ट मौजूद रहे। इसके अलावा एसोसिएशन ऑफ गाइनकोलॉजिकल ऑनकोलॉजिस्ट उत्तर प्रदेश साखा के प्रेसीडेंट डा.एचपी.गुप्ता,वाइस प्रेसिडेंट डा.उमा सिंह भी उपस्थित रहे। डा. रेखा सचान सहित अन्य वरिष्ठ महिला डाक्टर मौजूद थी।












