लखनऊ । रायबरेली के ऊंचाहार स्थित एनटीपीसी में हुए मरीजों का इलाज किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर में किया जा रहा है। यहां पर अभी तक ट्रामा सेंटर में कुल 12 मरीजों का इलाज चल रहा है। उनके इलाज प्लास्टिक सर्जरी में विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है। बृहस्पतिवार को केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट् ट ने पत्रकार वार्ता में मरीजों के इलाज में व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कल देर रात 13 बर्न मरीज गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर पहुंचे थे, इससे एक मरीज की मौत रास्ते में ही हो गयी थी।
बाकी 12 मरीजों की भी हालत गम्भीर थी। जिनकों 40 से प्लास्टिक सर्जन, ट्रामा सर्जरी, मेडिसिन सहित अन्य विशेषज्ञ डाक्टरों की देख रेख में रखा गया है। रोगी का पूरा इलाज सरकार के आदेशानुसार पूरी तरह नि:शुल्क किया जा रहा है। केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारी लगातार मरीजोंं पर नजर बनाये हुये हैं। प्लास्टिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. ए. के. सिंह ने बताया कि भर्ती होने वाले मरीजों में से सात मरीज 50 प्रतिशत से ज्यादा बर्न वाले हैं। उनकी हालत ज्यादा नाजुक है। इन मरीजों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद 32 बेड आरक्षित कर दिए गए थे, जिससे आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।
ऊंचाहार की घटना में घायल बर्न मरीज लगभग सात घंटे बाद केजीएमयू पहुंच सके। इस दौरान उनके शरीर में पानी की भारी कमी हो गयी। जिससे शरीर के अन्य अंगो को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया था। अभी इसकी पूरी जानकारी नहीं हो पायी है कि किस मरीज के शरीर के अंगो को कितनी क्षति हुयी है । इसका पता दो से तीन दिन बाद ही चल सकेगा। हमने बर्न मरीजों के पहुंचते ही फ्लयूड शुरू कर दिया था। जिससे उनकों रीनल फेल्योर से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि बर्न मरीजों में शरीर के ऊपरी समस्या से ज्यादा भीतर के अंगों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है। सबसे पहले पानी की कमी से किडनी में संक्रमण शुरू होता है।












