लखनऊ । अगर शरीर में हीमोग्लोबिन इलाज के बाद भी नहीं बढ रहा हो आैर कमजोरी लगातार बनी रहती हो। इसके साथ ही तिल्ली भी बढ़ गयी हो तो विशेषज्ञ डाक्टर से जांच कराकर इलाज कराये। यह ब्लड कैं सर के लक्षण भी हो सकता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैथालॉजी विभाग की कार्यशाला में डा. सुरेश ने दी। इसके साथ ही विभाग प्रमुख डा. आशुतोष ने बताया कि जल्द ही कैंसर के विभिन्न प्रकार की जांच करने के लिए नये मार्कर का प्रयोग करने का प्रस्ताव है। इन नये प्रकार के मार्कर का प्रयोग होने से डाक्टरों को इलाज करने में भी काफी मदद मिलेगी। इससे पहले तीन दिवसीय पैथकॉन -2017 के पहले दिन मास्टर क्लास लगाकर नये पैथालॉजिस्टों को विशेषज्ञों ने अपडेट किया।
डा. आशुतोष कुमार ने बताया कि लिवर,लंग सहित अन्य अंगों में कैंसर अलग प्रकार के होते है। ऐसे में जांच में टाइप आफ कैंसर की जानकारी जांच में मिलना आवश्यक है। इससे डाक्टरों को इलाज में मदद मिलती है। इसके अलावा कैंसर का पता लगाने के लिए सीबीसी की ब्लड टेस्ट भी कराना चाहिए। ताकि प्राथमिक जांच रिपोर्ट में अगर कोई दिक्कत आती है तो इलाज आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जीन लेबल पर जांच कर एनालिसिस करने पर कैंसर किस टाइप का है। इसका पता लग जाता है आैर डाक्टर उसी प्रकार से इलाज शुरू करता है।
डा. रश्मि कुशवाहा ने बताया कि कार्यशाला के पहले दिन मुम्बई के विशेषज्ञ डा. सुमित गुजराल ने ब्लड कैंसर के बारे में बताया कि कौन सी जांच से आसानी से पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण कीटनाशक का प्रयोग हद से अधिक प्रयोग करना होता है। डा. कुशवाहा ने बताया कि जल्द ही पैथालॉजी में कैंसर के विभिन्न प्रकार की जांच करने के लिए नये मार्कर बनाये जा रहे है। इससे कैंसर के इलाज आसान हो जाएगा।












