लखनऊ । बलरामपुर व सिविल की इमरजेंसी फुल होने के कारण बुधवार को कई मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। बुधवार दोपहर कई घंटे तक इमरजेंसी में बिस्तार की किल्लत बनी रही। जिनके पास इलाज कराने का पैसा नहीं था, ऐसे गंभीर मरीजों को भर्ती के लिये इंतजार करना पड़ा। बेड के अभाव में कुछ मरीजों का स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू हुआ। ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद से अस्पतालों में मरीजों का दबाव बढ़ गया। इन अस्पतालों में न्यूरो, मेडिसिन, हड्डी, नेफ्रोलॉजी समेत दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीज पहंुचे।
सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में कई उल्टी-दस्त, पीलिया और बुखार के मरीजों भी एडमिट हुए। उनको इमरजेंसी वार्ड में भेजकर ग्लूकोज चढ़ाया गया। दवा देने के बाद कुछ मरीजों को वापस कर दिया गया। जिनकी हालत गंभीर थी उनको वार्ड में शिफ्ट किया गया। कामोबेश यही हाल गोमतीनगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में देखने को मिला। एक-एक बेड को लेकर मारामारी मची। तीमारदार पांवर-पहुंच का इस्तेमाल करते नजर आए, लेकिन सीमित संसाधनों के चलते उन्हें तत्काल राहत मिल पाना संभव नहीं था।
बलरामपुर अस्पताल में आयी सीतापुर की एक महिला कीअंगुली में सांप ने काट लिया था। उसको डाक्टरों की देखरेख में इलाज किया गया। उसकी हालत में सुधार होने पर वार्ड नम्बर सात में शिफ्ट कर दिया गया। इस बीच तीमारदार बेड के अभाव में अपने मरीज का इलाज प्राइवेट अस्पताल कराने की बात कहकर गए। उनका आरोप था कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर इलाज न मिलने से प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना मजबूरी है।












