डाक्टरों ने बच्चों के मानसिक बीमारी पर अनुभव साझा किये

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लखनऊ। लखनऊ एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के तत्वावधान में रविवार को केजीएमयू के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्र-स्तरीय बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ न्यूरोलॉजी सेमीनार का आयोजन किया गया, इसमें देश के करीब 400 बाल रोग विशेषज्ञ एवं बालरोग न्यूरोलाजिस्ट ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप-मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से चिकित्सा अपने अनुभव साझा करते हैं, जो चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाता है।

लखनऊ एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के सचिव डा. आशुतोष वर्मा ने कहा कि बाल रोग चिकित्सा में नई उम्मीदें नजर आई एवं चिकित्सा की नई तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई तथा नवजात शिशुओं की चिकित्सा एवं सेहत पर विशेष रूप से फोकस रहा। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु के तीमारदार दिमागी रूप से असंतुलित अवस्था में रहते हैं, ऐसे में चिकित्सकों को उनकी भावनाओं का सम्मान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टाफ आधुनिक चिकित्सा के कई पहलुओं से रूबरू हुआ है। सेमीनार में आये नवजात शिशु विशेषज्ञों ने पोस्टर एवं प्रजेंटेशन के माध्यम से अपने शोध एवं आधुनिकतम चिकित्सा विधियों को प्रस्तुत किया।

साथ ही नवजात शिशुओं में प्रोबयोटिक के इस्तेमाल पर एवं चुनौतिया पर विस्तृत रूप से जानकारी दी। संगोष्ठी में प्री-मेचयोर शिशुओं की स्थिति, उनके इलाज की विभिन्न स्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। सेमिनार में चिकित्सकों ने बाल रोग से संबंधित गंभीर बीमारियों के शोध पत्रों का व्याख्यान दिया। बाल रोगों से जुड़ी कई ऐसी बीमारियां हो रही हैं, जिसमें शोध हो रहा है साथ ही नवजात शिशुओं में जन्मजात बीमारियों और विधियों और उनके इलाज की जानकारी दी।

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