14 दिन तक जीवित रखी जा सकती है कार्निया

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Photo Source: Koch Eye Associates

लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के आई बैंक में पिछले पांच माह में सौ से अधिक कार्नियां का प्रत्यारोपण करके काफी उत्साहित है। मंगलवार को ब्रााउन हाल में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने बताया कि प्रदेश में 650 कार्निया के प्रत्यारोपण किये गये, जबकि इस वर्ष केजीएमयू आई बैंक द्वारा प्रथम 5 माह में ही 100 से अधिक कार्नियां प्रत्यारोपण होना उत्साहवर्धक है। केजीएमयू में आई बैंक द्वारा अपनी संचालन से उत्तर प्रदेश के लगभग 110 से अधिक जनमानस को कार्निया प्रत्यारोपण के द्वारा रोशनी प्रदान की गई है। इसके लिए 24 घण्टे नेत्र/कार्निया दान के प्रोत्साहन में सहायक भूमिका का निर्वाहन किया जा रहा है।

केजीएमयू प्रशासन की कोशिश प्रदेश का सबसे बड़ा कार्नियां प्रत्यारोपण केन्द्र बनाने की

जनमानस को प्रत्येक मृत्यु के सन्दर्भ में नेत्रदान के लिए संचालित नि:शुल्क नं0-1919 पर सूचना देना होता है। कार्निया दान की प्रक्रिया में मात्र 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इस प्रक्रिया में दानकर्ता के पारिवार को किसी भी तरह का वित्तीय व्यय का वहन नहीं करना पड़ता है जबकि प्रत्येक कार्निया के दान से एक जनमानस जोकि अन्धता से पीड़ित है, को ऑखों की रोशनी प्राप्त होती है। इस मौके पर कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डा. अपजित कौर, नेत्र विभाग प्रो. अरून शर्मा, प्रभारी आई बैंक क्लेयर बोनिला ने भी नेत्रदान को बढ़ाया दिये जाने पर जोर दिया।

नेत्रदान के लिए महत्वपूर्ण

  • किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति मृत्यु के बाद नेत्रदान करने की प्रतिज्ञा कर सकता है।
  • आंख मृत्यु के बाद छह घण्टे के अंदर निकालनी होती है।
  • कार्निया निकलने में 10 से 15 मिनट ही लगते हैं।
  • आई बैंक में 14 दिन तक जीवित रखी जा सकती है कार्नियां
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