PGI : कटे हाथ को जोड़कर लड़की को विकलांग होने से बचाया

0
567

 

Advertisement

 

 

 

 

लखनऊ .संजय गांधी पी जी आई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक 10 वर्षीय बच्ची के कंधे से कटे हाथ को दोबारा जोड़ दिया। डॉक्टरों के प्रयास से बच्ची विकलांग होने से बच गईं । निगोंहा इलाके में रहने वाली 10 साल की बच्ची का दाहिना हाथ 23 फरवरी को शाम साढ़े चार बजे तेल निकालने की मशीन में फंसने से कंधे के नीचे से पूरी तरह कटकर अलग हो गया था. बच्चे के परिवारजन उसे तुरंत पीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर ले आये, जिसके बाद डाक्टरों की टीम ने इलाज किया । मरीज को उसके माता-पिता शाम 5:30 बजे तक एपेक्स ट्रामा सेंटर लेकर पहुंच गये. यहां प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया के डॉक्टर की टीम ने मरीज और उसके कटे हुए दाहिने हाथ की बारीकी से जांच की. जरूरी जांचों के बाद तुरंत ही उसे आपरेशन थियेटर में शिफ्ट कर दिया गया। कटे हुए हाथ की ऑपरेशन थियेटर में लाकर सफाई की गयी, इसके बाद कटे हाथ को जोड़ने की तैयारी शुरू की गयी।

 

 

 

सर्जरी के बाद बच्ची के कटे हुए हाथ ही नियमित निगरानी की गयी. 48 घंटों तक उसको आईसीयू में भर्ती कर
प्रतिदिन उसकी ड्रेसिंग की गयी व अन्य जरूरी इंजेक्शन व दवाएं दी गयीं. कटे हुए हाथ में पूर्ण रूप से रक्त प्रवाह आने के बाद बच्ची को पी एम एस एस वाई में शिफ्ट कर दिया गया । कुछ दिनों बाद उसकी छुट्टी कर दी गईं हैं। बच्ची के हाथ को जोड़ने में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टर व बेहोशी के डाक्टर शमिल थे.

 

 

 

 

यह जटिल आपरेशन चार घंटे चला. प्लास्टिक सर्जन डॉ. अंकुर भटनागर की टीम ने माइक्रोवस्कुलर तकनीक से यह आपरेशन किया। हाथ कटने के कारण काफी मात्रा में खून बह गया था. इसलिये बच्ची को 3 यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो.अंकुर भटनागर ,डा अनुपमा सिंह, डा राजीव भारती, सीनियर रेजिडेंट डा तंजूम कांबोज,डा भूपेश गोगिया,डा गौतम , आर्थो के डा केशव ,डा सिद्धार्थ, ट्रामा के एनेस्थीसिया और इंटेंसिव केयर टीम के डा प्रतीक,डा वंश, डा रफत, डा सुरुचि, सहित ओटी टीम और आईसीयू के रेजिडेंट स्टाफ थे ।

 

 

 

 

 

शरीर का कोई अंग कटे तो क्या करें
सबसे पहले कटे हुए भाग को किसी साफ कपड़े में रख ले और तुरंत उसे बर्फीले पानी में रखे।
कटे हुए भाग पर साफ कपड़ा बांध दे अथवा ड्रेसिंग कर दें।
बिना किसी देरी के पास के अस्पताल में जाए जहां पर रिप्लांटेशन की सुविधा मौजूद हो। कटे हुए अंग को जोड़ने का गोल्डन पीरिएड 6-8 घंटे का होता है तथा इस दौरान रीइपांलट करने पर रिजल्ट अच्छा होता है। इसलिये देरी नहीं करनी चाहिये।

Previous article40 वर्ष के आसपास यह लक्षण दिखे हो सकती है यह गंभीर बीमारी
Next articleUP के 22 ज़िलों में नल कनेक्शन देने का आंकड़ा 50 फ़ीसदी के पार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here