लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में सोमवार दोपहर में समय पर इलाज न मिलने पर स्ट्रेचर पर मरीज की मौत हो गयी। तीमारदारों का आरोप है कि डॉक्टर इलाज ने नाम जांच के लिए दौड़ाते रहे। मरीज को समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। आक्रोशित तीमारदारों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे, तो वहां पर तैनात गार्डो ने उन्हें धक्के देकर बाहर कर दिया। उनके अंदर न पाने के कारण एक घंटे तक कैजुल्टी बाहर स्ट्रेचर पर लाश पड़ी रही। बाद में कुछ तीमारदार शव लेकर चले गए हैं।
बहराइच के रहने वाले रामराज (72) सोमवार को लिवर की दिक्कत होने पर सुबह गंभीर हालत में तीमारदारों ने केजीएमयू ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी में भर्ती कराया। जांच में पाया गया कि उन्हें लिवर में दिक्कत थी। स्थानीय डॉक्टरों जांच के बाद मरीज की हालत गंभीर देख उसे एंबुलेंस से सोमवार दोपहर ट्रॉमा सेंटर भेजा था। जहां कैजुल्टी में डॉक्टर मरीज को भर्ती करने से पहले जांच कराने व अन्य विभागों के तीन घंटे तक परिक्रमा कराते रहे। तीमारदार विनोद का आरोप है कि इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ गई।
फिर भी तैनात किसी डॉक्टर ने मरीज को हाथ नहीं लगाया। इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। आक्रोशित तीमारदारों ने लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे तो गार्डो ने तीमारदार को बाहर खदेड़ दिया। इस दौरान तीमारदारों के अंदर न पाने के कारण करीब एक घंटे तक कैजुल्टी बाहर लाश स्ट्रेचर पर पड़ी रही। इसके बाद किसी तरह अन्य तीमारदारों ने रुपये का जुगाड़ करके शव वाहन मंगवाकर शव लेकर वापस चले गए।
केजीएमयू प्रवक्ता, डॉ. सुधीर सिंह का तर्क है कि ट्रॉमा कैजुल्टी में आने वाले हर मरीज को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाता है। तीमारदारों के आरोप गलत है। तीन घंटे तक इलाज न मिलना मुनासिब नहीं है।
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