लखनऊ। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में तैनात हजारों नर्सों ने शासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 22 सितंबर 2026 तक उनकी लंबित मांगों पर शासनादेश (GO) जारी नहीं किया गया, तो 26 सितंबर को संघ की कार्यकारिणी बैठक में चरणबद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया जाएगा।
आश्वासन और सहमतियों के बावजूद जारी नहीं हुआ शासनादेश
राजकीय नर्सेज संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि आठ नवंबर 2025 को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संघ की 13 में से 5 प्रमुख मांगों पर स्पष्ट सहमति जताई थी। इसके बाद महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी। 2 फरवरी 2026 को अपर मुख्य सचिव अमित घोष के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी जल्द शासनादेश जारी करने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी फाइलें शासन में अटकी हुई हैं।
एक ही राज्य में दोहरे मापदंड: भत्तों और गृह जनपद स्थानांतरण में भेदभाव
नर्सिंग संवर्ग का सबसे बड़ा मुद्दा ‘समान कार्य के लिए समान भत्ता’ है। संघ का कहना है कि जब केजीएमयू, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान और सैफई यूनिवर्सिटी की तरह पद, शैक्षणिक योग्यता और काम की जिम्मेदारी एक जैसी है, तो स्वास्थ्य विभाग और कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के कर्मचारियों को समान भत्ते क्यों नहीं मिल रहे? इसके अलावा, लंबे समय से गृह जनपद स्थानांतरण की मांग लंबित है। आरोप है कि स्थानांतरण सत्र में केवल कुछ चुनिंदा लोगों का ही गृह जनपद में तबादला किया गया, जिसकी जांच भी अधर में लटकी है।
उच्च पदों पर रिक्तियां, एसीपी और अध्ययन अवकाश का संकट
प्रदेश के चिकित्सालयों से लेकर निदेशालय स्तर तक 2010 से नर्सिंग संवर्ग के दर्जनों उच्च पद खाली पड़े हैं। नियमानुसार वर्ष में दो बार दी जाने वाली एसीपी (ACP) भी कर्मचारियों को नहीं मिल रही है। इसके साथ ही, महिला कर्मचारियों के लिए क्रेच (पालनाघर) की सुविधा केवल कागजों तक सीमित है। संघ की मांग है कि Post Basic B.Sc. की तर्ज पर M.Sc. Nursing के लिए भी कर्मचारियों को सवेतन अध्ययन अवकाश दिया जाए तथा मेडिकल कॉलेजों में अपग्रेड हो रहे जिला अस्पतालों के स्टाफ के समायोजन का रास्ता साफ किया जाए।
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल मौखिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि 22 सितंबर तक ठोस शासनादेश नहीं आया, तो 26 सितंबर से पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की जिम्मेदारी शासन की होगी।












