लखनऊ। रक्तदाओं में काफी लोगों को कुछ कमियों की वजह से रक्त देने से मना दिया जाता है, पर इसमें सुधार किया जा सकता है। गंभीर बीमारियां बढ़ने के कारण खून की अत्याधिक जरूरत पड़ रही है। इसलिए ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में संशोधन की जरूरत महसूस की जा रही है। यह जानकारी शनिवार को होटल ताज में ट्रांसमेडिकॉन 2017 में किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की डा. तूलिका चंद्रा ने दी। कार्यशाला में अन्य विशेषज्ञों ने भी जानकारी दी।
कार्यशाला में डा. तूलिका चंद्रा ने बताया कि संशोधन से रक्तदाताओं की संख्या में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने वालों की उम्र में संशोधन किया गया है। अब 60 के बजाए 65 वाले भी स्वस्थ्य व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मरीज के क्रोमोसोम स्तर पर जांच कर स्टेम सेल से इलाज को बढ़ावा दिया जा सकता है। वर्तमान में थैलसीमिया, कैंसर, एनीमिया समेत दूसरी बीमारी में सिर्फ मरीज के भाई- बहन व माता- पिता के बोनमैरो और खून की जांच के बाद किया जा रहा था। अब स्टेम सेल से इलाज किया जाता है। यदि क्रोमोसोम स्तर पर जांच की जाए तो डोनर की संख्या और बढ़ाई जा सकता है। इससे उन मरीजों को भी फायदा होगा जिनके पास कोई भी परिजन नहीं है। ं चीन से आए डॉ. मिकी ने कही।
मुंबई के डॉ. राजेश सांवत ने कहा कि ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट करीब 40 साल पुराना है। उस वक्त तकनीक आैर इलाज का नजरिया दूसरा था। अब नई तकनीक से खून की जांच आसान हो गई है। नैट समेत दूसरी जांचों से खून में पनपे बैक्टीरिया और वायरस का पता लगाया जा सकता है।












