नवरात्रि कन्या पूजन: आयु के अनुसार जानें माँ दुर्गा के नौ स्वरूप और उनका महत्व

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​लखनऊ। नवरात्रि के पवित्र अवसर पर कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को साक्षात माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। इस अनुष्ठान में कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को ‘बटुक भैरव’ के रूप में भी बैठाने की प्राचीन परंपरा है, जिसके बिना पूजन अधूरा माना जाता है।

​ ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल (स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ) के अनुसार, आयु के प्रत्येक वर्ष के साथ कन्या का रूप और उसका विशेष नाम बदल जाता है। इन रूपों की विधि-विधान से आराधना करने पर साधक को सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
​आयु के अनुसार माँ दुर्गा के विभिन्न रूप
​2 वर्ष – कुमारी: इस आयु की कन्या को माँ शैलपुत्री का रूप माना जाता है। इनकी पूजा से घर में सुख, शांति और आरोग्य का वास होता है।

​3 वर्ष – त्रिमूर्ति: यह त्रिदेवी (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) का प्रतीक है। इनकी आराधना से धन, विद्या और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
​4 वर्ष – कल्याणी: इस उम्र की कन्या को माँ कल्याणी के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों के सभी संकटों को दूर कर कल्याण करती हैं।
​5 वर्ष – रोहिणी: रोहिणी रूप की पूजा करने से शारीरिक कष्टों, रोगों और दूर-भाग से मुक्ति मिलती है तथा उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।
​6 वर्ष – कालिका: यह रूप अज्ञानता और शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है। इनकी पूजा से जीवन में वीरता और साहस का संचार होता है।
​7 वर्ष – चंडिका: माँ चंडिका का यह स्वरूप भक्तों की रक्षा करता है और जीवन की सभी बाधाओं व संकटों को चुटकियों में दूर करता है।
​8 वर्ष – शाम्भवी: इस आयु की कन्या की पूजा करने से साधक को मोक्ष, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
​9 वर्ष – दुर्गा: यह साक्षात माँ दुर्गा का स्वरूप है, जो शत्रुओं का संहार करने वाली और असंभव कार्यों को संभव बनाने वाली मानी जाती हैं।
​10 वर्ष – सुभद्रा: सुभद्रा रूप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला और भक्तों के जीवन में सौभाग्य लाने वाला माना गया है।

​ज्योतिषाचार्य नागपाल का कहना है कि सच्चे मन से इन स्वरूपों का पूजन करने से माँ दुर्गा अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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