kgmu नेत्र विभाग में बड़ा खुलासा: मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने का दबाव, डॉक्टर निलंबित

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17 मरीजों ने दिए सबूत, विभागाध्यक्ष और प्रतिकुलपति से भी मांगा गया जवाब

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के नेत्र रोग विभाग में मरीजों को बाहर से दवाएं, लेंस और चिकित्सा उपकरण खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। वहीं विभागीय निगरानी में कथित लापरवाही को लेकर विभागाध्यक्ष एवं प्रतिकुलपति डॉ. अपजीत कौर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

जांच समिति ने 30 मरीजों से संपर्क किया, जिनमें से 17 मरीजों ने बयान दर्ज कराते हुए बाहर से दवाएं और लेंस खरीदने के साक्ष्य प्रस्तुत किए। आरोप है कि मरीजों को निर्धारित निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदने के लिए भेजा जाता था, जबकि वही सामग्री अस्पताल में कम कीमत पर उपलब्ध थी।

प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि अब्बास नाम का एक बाहरी व्यक्ति लंबे समय से ओपीडी में सक्रिय था। वह मरीजों को दवाओं की पर्ची देकर विशेष मेडिकल स्टोरों का पता बताता था। प्रशासन ने उसके खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

जांच में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ओटी सिस्टर इंचार्ज चेतना के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

प्रशासन ने विभागाध्यक्ष डॉ. अपजीत कौर से पूछा है कि विभाग में नियमों का पालन सुनिश्चित करने और बाहरी व्यक्ति की वर्षों से मौजूदगी रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए थे।

मामला 1: आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मांगे गए हजारों रुपये

काकोरी निवासी गीता कश्यप के परिजनों का आरोप है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए उन्हें लेंस और दवाओं सहित लगभग 21 हजार रुपये का सामान बाहर से खरीदने को कहा गया। जबकि उनके पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी था।

मामला 2: मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंची शिकायत

गोरखपुर के एक मरीज ने आरोप लगाया कि उनसे करीब 18 हजार रुपये की दवाएं और लेंस बाहर से खरीदवाए गए, जबकि वही सामग्री अस्पताल के स्टोर में 5 से 6 हजार रुपये में उपलब्ध थी। शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने जांच समिति गठित की।

मामला 3: गैस डालने के नाम पर वसूले गए 9 हजार रुपये

एक रेटिना मरीज ने आरोप लगाया कि आंख में गैस डालने के लिए उससे 9 हजार रुपये जमा कराए गए, लेकिन प्रक्रिया की ही नहीं गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

प्रशासन का सख्त रुख

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि मरीजों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

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