लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में पेशेंट दलाली के आरोप में संविदा के तीन एम्बुलेंस चालकों को नौकरी से निकाला है। आरोप हैं कि तीनों एम्बुलेंस चालक ने निजी अस्पतालों के दलालों से मिले हुए थे। बहला-फुसलाकर बेहतर इलाज के नाम पर ट्रॉमा आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट करते थे। केजीएमयू प्रशासन ने दलाली से जुड़े वीडियो की जांच और पुलिस की सूचना के आधार पर एक्शन लिया है।
ट्रॉमा सेंटर में ज्यादातर बेड हमेशा फुल रहते हैं। बिस्तर फुल होने की स्थिति में मरीजों को स्ट्रेचर पर भर्ती करने कर इलाज कियाजता है, लेकिन कई बार स्ट्रेचर हीं नहीं मिल पाता था। प्रदेश भर से आने वाले गंभीर मरीजों को बेड की कमी के चलते खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। मरीजों की दिक्कतों का फायदा निजी अस्पताल के दलाल उठा रहे हैं। यह दलाल ट्रॉमा कर्मचारियों से साठगांठ कर मरीजों को निजी अस्पताल में शिफ्ट कराने का नेटवर्क चला रहे थे।
ट्रॉमा सेंटर प्रशासन को मरीजों की दलाली के नेटवर्क का पता था।, लेकिन कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे । जांच में इसमें ट्रॉमा में संविदा पर तैनात तीन एम्बुलेंस चालक की भूमिका संदिग्ध पाई गई। ट्रॉमा प्रशासन ने मामले की जांच की। कुछ वीडियो में मरीजों की शिफ्टिंग का खेल भी देखा। ट्रॉमा चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने भी तीनों एम्बुलेंस चालकों की गतिविधियों से ट्रॉमा प्रशासन को जानकारी दी।
इसके बाद ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने उच्च अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। उच्च अधिकारियों के आदेश पर तीनों आरोपी संविदा एम्बुलेंस चालकों को नौकरी से निकाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि मरीजों की दलाली करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।












