लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में सामने आए करोड़ों रुपये के दवा घोटाले का खामियाजा अब गरीब और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल की असाध्य योजना के तहत नए मरीजों का पंजीकरण टालमटोल का शिकार हो गया है, जबकि पुराने मरीजों के कार्ड का नवीनीकरण भी अटका पड़ा है। इसका सीधा असर उन गरीब मरीजों पर पड़ रहा है जिनका इलाज पूरी तरह इस योजना पर निर्भर है।
दरअसल, केजीएमयू में असाध्य योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन इसी योजना में सेंध लगाकर करीब ढाई करोड़ रुपये के दवा घोटाले का मामला उजागर हुआ। जांच में KGMU Urology Department के भीतर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद विभागाध्यक्ष को पद से हटा दिया गया। इसके अलावा तीन संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित किया गया और पूरे मामले में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
घोटाले के बाद अब अस्पताल प्रशासन और कर्मचारी असाध्य योजना के तहत नए मरीजों का पंजीकरण करने से बच रहे हैं। पुराने मरीजों के कार्ड में धनराशि अपडेट नहीं हो रही, नवीनीकरण प्रक्रिया ठप है और मरीज वार्ड से लेकर मुख्य पीआरओ भवन तक चक्कर काटने को मजबूर हैं।
चार मामलों ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। उन्नाव निवासी रामचंदर खून से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और कार्ड बनने के बावजूद दवा के लिए भटकना पड़ रहा है। कमोबेश काफी संख्या में ऐसे मरीज है जिनको समय पर दवा देने की बजाय कार्ड का नवीनीकरण करने के लिए कहा गया है।
केजीएमयू में हुए दवा घोटाले पर कार्रवाई तो शुरू हो गई है, लेकिन सवाल यह है कि भ्रष्टाचार करने वालों की सजा आखिर गरीब मरीज क्यों भुगतें? कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की चुप्पी और कर्मचारियों की बेरुखी ने असाध्य योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।











